नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। समाजवादी पार्टी ने पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को फिर से NSG सुरक्षा देने की मांग की है। इसके लिए सपा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखी है। सपा का कहना है कि अखिलेश यादव को फिलहाल Z+ सुरक्षा मिली हुई है, लेकिन यह नाकाफी है और उन्हें फिर से NSG सुरक्षा दी जानी चाहिए।
अखिलेश यादव का हमला: “तुम हमें डराना चाहते हो”
सुरक्षा को लेकर अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला किया। उन्होंने कहा, “जिस दिन तुमने मेरी NSG सुरक्षा वापस ली थी, उसी दिन मैं तुम्हारी मंशा समझ गया था। तुम हमें डराना चाहते हो। लेकिन जो असल में डरपोक हैं, वो खुद NSG सुरक्षा घेरे में रहते हैं।” उनके इस बयान के बाद राजनीति गर्मा गई है।
क्या है पूरा मामला?
2012 में NSG सुरक्षा मिली थी जब अखिलेश यादव यूपी के मुख्यमंत्री बने थे, तब उन्हें केंद्र सरकार ने NSG सुरक्षा दी थी। मोदी सरकार ने 2019 में सुरक्षा की समीक्षा के बाद NSG सुरक्षा हटा दी थी और यूपी पुलिस की सुरक्षा दे दी गई थी। सपा का कहना है कि वर्तमान हालात को देखते हुए NSG सुरक्षा फिर से जरूरी है।
चुनाव से पहले सियासी रणनीति?
अखिलेश यादव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वे 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटे हैं। उनके इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक बीजेपी पर दबाव बनाने और विपक्ष को एकजुट करने की रणनीति बता रहे हैं। विपक्षी दल पहले से ही केंद्र सरकार पर लोकतंत्र को कमजोर करने और नेताओं को डराने के आरोप लगा रहे हैं।
BJP का जवाब: डर की कोई बात नहीं
बीजेपी ने अखिलेश के बयान को सस्ती लोकप्रियता पाने की कोशिश बताया। यूपी बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा, “अखिलेश यादव को डरने की कोई जरूरत नहीं है। उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था मजबूत है। NSG सुरक्षा हटाना गृह मंत्रालय का तकनीकी फैसला था। इसमें कोई राजनीति नहीं थी। अब बड़ा सवाल यही है क्या अखिलेश यादव को वाकई कोई खतरा है या यह सब सियासी दबाव बनाने की एक रणनीति है? आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बयानबाज़ी की संभावना है।





