नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । हाल ही कांग्रस के सीनियर लीडर और लोकसभा में विपक्ष के नेता सांसद राहुल गांधी असम के दौरे पर थे। वहां कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सूबे के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर एक बयान दिया था जिसके बाद राज्य की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी के असम दौरे पर दिए गए कथित बयान को लेकर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने तीखा पलटवार किया है।
सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया एक्स हैंडल पर लिखा- जो खुद देशभर में कई मामलों में जमानत पर हैं, वो दूसरों को जेल भेजने की बात कर रहे हैं। यह टिप्पणी कांग्रेस की असम में रणनीतिक बैठक के बाद सामने आई है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी असम दौरे पर थे, जहां उन्होंने कांग्रेस की राज्य स्तरीय राजनीतिक मामलों की समिति के साथ एक बंद में बैठक की। इस बैठक में उन्होंने कथित रूप से कहा कि लिख कर ले लीजिए, हिमंत बिस्वा सरमा को जेल जरूर भेजा जाएगा। सीएम सरमा खुद को ‘राजा’ समझते हैं, लेकिन असम की जनता उन्हें भ्रष्टाचार के लिए जेल भेजेगी।
राहुल ने आगे कहा कि सीएम और उनके परिवार को घोटालों का जवाब देना होगा। वहीं, सीएम सरमा ने इस बयान को राहुल की दुर्भावना और राजनीतिक प्रतिशोध की भावना बताया। सात ही उन्होंने इसे राजनीतिक मंच का दुरुपयोग करार दिया है।
सीएम हिमंत का पलटवार
हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी के बयान पर पलटवार करते हुए एक्स पर एक पोस्ट में लिखा- राहुल गांधी भूल गए कि वे स्वयं देशभर में दर्ज कई आपराधिक मामलों में जमानत पर हैं। सीएम सरमा ने राहुल को तंज कसते हुए कहा कि, आप असम की मेहमाननवाजी का आनंद लीजिए। इसके साथ ही आगे उन्होंने कहा कि केवल मुझे जेल भेजने की बात कहने के लिए राहुल गांधी असम आए हैं।
बयान के बाद कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने
इस बयानबाजी के बाद असम में सियासी पारा हाई हो गया है। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी और भाजपा के मुख्यमंत्री सरमा के बीच यह तकरार सीधे तौर पर दोनों दलों की रणनीति और विचारधारा को सामने रखती है। कांग्रेस राज्य में भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार और तानाशाही के आरोप लगाती रही है, जबकि भाजपा कांग्रेस को परिवारवाद और कानूनी मामलों में घिरा हुआ बताती है।
क्या हैं राहुल गांधी के खिलाफ केस?
सीएम सरमा के बयान के अनुसार, राहुल गांधी देश के कई हिस्सों में आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। और वह एक मामले में जमानत पर है। उसमें से एक सबसे चर्चित मामला ‘मोदी सरनेम’ टिप्पणी वाला है, जिसमें मानहानि का आरोप लगा और उन्हें 2 साल की सजा भी सुनाई गई थी। हालांकि, बाद में सजा पर रोक लगी और उन्हें जमानत मिली।




