नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में गुरुवार तड़के कुदरत ने कहर बरपाया। चशोती गांव में बादल फटने से भारी तबाही मच गई। देखते ही देखते पूरा इलाका पानी की तेज़ धाराओं में समा गया। हादसे में अब तक 12 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन और सेना की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।
बता दे, चशोती वही इलाका है जहां से प्रसिद्ध मचैल माता यात्रा की शुरुआत होती है। ऐसे में हादसे के वक्त वहां श्रद्धालुओं की भीड़ मौजूद थी, जिससे स्थिति और भयावह हो गई।प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, गुरुवार सुबह कुछ ही मिनटों में आसमान से मानो आफत टूट पड़ी। पानी के साथ कीचड़, पत्थर और मलबा इतनी तेज़ी से बहा कि कई घर, दुकानें और गाड़ियां पल भर में तबाह हो गईं। सड़कों पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लोगों ने किसी तरह ऊंचाई पर भागकर अपनी जान बचाई।
केंद्र से लेकर उपराज्यपाल तक सक्रिय
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने हालात की गंभीरता को देखते हुए किश्तवाड़ के डीसी पंकज शर्मा से तत्काल बात की और बचाव दल भेजने का निर्देश दिया। उन्होंने बताया कि “चशोती में हालात गंभीर हैं, लेकिन प्रशासन सतर्क है। केंद्र सरकार हरसंभव मदद देगी।”
वहीं स्थानीय विधायक सुनील शर्मा ने कहा, “अभी तक कुल आंकड़े नहीं मिले हैं, लेकिन तबाही भारी है। NDRF टीम की ज़रूरत है। मैं खुद मौके के लिए रवाना हो गया हूं। उधर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए अधिकारियों को 24×7 राहत कार्य जारी रखने और प्रभावितों को हरसंभव सहायता देने के निर्देश दिए हैं।
मौसम विभाग की चेतावनी,अभी और बरस सकता है कहर
श्रीनगर मौसम विज्ञान केंद्र ने चेतावनी दी है कि अगले 4 से 6 घंटे बेहद संवेदनशील हैं। किश्तवाड़ समेत डोडा, पुंछ, राजौरी, रियासी जैसे इलाकों में मध्यम से भारी बारिश, बिजली कड़कने और तेज़ हवाएं चलने की आशंका है।लोगों को पुराने पेड़ों, बिजली के खंभों और ढीली संरचनाओं से दूर रहने की सख्त हिदायत दी गई है। झीलों और जलाशयों में नौकायन गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है।
धराली की त्रासदी अभी भूले नहीं थे, और एक ज़ख्म जुड़ गया
गौरतलब है कि कुछ ही दिन पहले, 5 अगस्त को उत्तराखंड के उत्तरकाशी के धराली में भी भीषण बादल फटने की घटना हुई थी। वहां अब भी दर्जनों लोग लापता हैं। कई मकान, होटल और होमस्टे पानी में समा गए थे। अब किश्तवाड़ की ये घटना फिर उसी तरह का दर्द दोहरा रही है।
किश्तवाड़ की ज़मीन कांपी, दिल दहल गया
इस समय पूरे इलाके में डर और मातम पसरा है। प्रशासन ने राहत शिविर बनाए हैं। स्थानीय लोगों के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर भी विशेष इंतज़ाम किए जा रहे हैं। एसडीआरएफ, एनडीआरएफऔर सेना की टीम रेस्क्यू में जुटी हैं, लेकिन पहाड़ी इलाका और लगातार बारिश काम में बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रही है।हमने कभी ऐसा मंजर नहीं देखा, एक स्थानीय निवासी ने रोते हुए कहा,”सिर्फ 5 मिनट में सब कुछ खत्म हो गया। खेत, घर, मवेशी सब बह गए। अब बचा ही क्या है।





