नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । भारत सरकार कल यानी 7 मई को देशभर के 244 चयनित सिविल डिफेंस जिलों में एक बड़े पैमाने पर मॉक ड्रिल आयोजित करने जा रही है। इस राष्ट्रव्यापी अभ्यास का उद्देश्य यह परखना है कि यदि देश को युद्ध जैसी स्थितियों, जैसे मिसाइल या हवाई हमलों का सामना करना पड़े, तो आम नागरिक और आपात सेवाएं कितनी तेजी और प्रभावशीलता से प्रतिक्रिया देती हैं।
इस अभ्यास में युद्ध जैसी परिस्थितियां सजीव रूप में तैयार की जाएंगी। इसमें हवाई हमले के सायरन बजाए जाएंगे, शहरी क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद की जाएगी, लोग सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने का अभ्यास करेंगे और आपातकालीन सेवाएं तत्परता से सक्रिय हो जाएंगी। इस ड्रिल का मुख्य उद्देश्य है संकट की घड़ी में घबराहट और अफरा-तफरी को कम करना, नागरिकों को सतर्क और तैयार बनाना और कीमती जानों की रक्षा करना।
शीत युद्ध के दौर की याद दिलाती ये तैयारियां
ऐसी तैयारियां बीते शीत युद्ध के दौर की याद दिलाती हैं, लेकिन वर्तमान वैश्विक हालात और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव इन अभ्यासों को एक बार फिर प्रासंगिक बना रहे हैं। देशभर में 7 मई को होने जा रहे इस राष्ट्रव्यापी सुरक्षा अभ्यास के लिए गृह मंत्रालय ने 2 मई को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विस्तृत दिशा-निर्देश भेजे हैं। यह मॉक ड्रिल सिविल डिफेंस रूल्स, 1968 के तहत आयोजित की जा रही है।
इस ड्रिल में स्थानीय प्रशासन, सिविल डिफेंस वार्डन, होम गार्ड्स, राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC), राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS), नेहरू युवा केंद्र संगठन (NYKS) और स्कूल-कॉलेजों के छात्र सक्रिय रूप से भाग लेंगे। इस तरह की कवायद यह साफ संदेश देती है कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना की जिम्मेदारी नहीं है। जब आम नागरिक आपात स्थिति में सही समय पर, सही कदम उठाने और संयम बनाए रखने में सक्षम होते हैं, तो देश की सुरक्षा संरचना अधिक मजबूत बन जाती है। यह अभ्यास केवल प्रतिक्रिया देने का नहीं, बल्कि पूर्व-चेतावनी और जन-जागरूकता का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
ड्रिल की प्रमुख गतिविधियां
इस मॉक ड्रिल के दौरान देशभर के संवेदनशील इलाकों और महत्वपूर्ण संस्थानों में हवाई हमले के सायरनों का परीक्षण किया जाएगा, ताकि नागरिकों को आपात स्थिति में तुरंत सतर्क किया जा सके। यह मॉक ड्रिल स्कूलों, दफ्तरों और सामुदायिक केंद्रों में आयोजित होंगी, जिनमें नागरिकों को सिखाया जाएगा कि संकट की घड़ी में कैसे गिरकर खुद को छिपने (Drop-and-Cover), नजदीकी शरण स्थलों की पहचान कैसे करें, प्राथमिक चिकित्सा कैसे दें, और मानसिक तनाव को कैसे नियंत्रित करें।
इसके अलावा, अभ्यास के दौरान अचानक बिजली बंद कर दी जाएगी। ये ऐसी रणनीति है जो 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के समय इस्तेमाल की गई थी ताकि रात के समय शहरों को दुश्मन की हवाई निगरानी से बचाया जा सके। सामरिक महत्व की संरचनाएं जैसे सैन्य ठिकाने, संचार टावर और पावर प्लांट विशेष कवच से ढके जाएंगे, जिससे उन्हें ड्रोन से पहचान पाना मुश्किल हो जाए। ड्रिल का एक और महत्वपूर्ण पहलू होगा हाई-रिस्क इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का व्यावहारिक अभ्यास। यह न केवल वास्तविक निकासी योजनाओं को सामने लाएगा, बल्कि किसी संभावित बाधा या खामी को पहले ही पहचानने में मदद करेगा।
पहलगाम हमले के मद्देनजर बढ़ी सुरक्षा सतर्कता
यह मॉक ड्रिल 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सरकार द्वारा अपनाए गए व्यापक सुरक्षा उपायों का हिस्सा है। इस भीषण हमले में 26 भारतीय पर्यटकों की हत्या हो गई थी। जांच एजेंसियों ने इसके पीछे पाकिस्तान-आधारित आतंकी संगठनों की संलिप्तता की आशंका जताई है। हमले के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई उच्च-स्तरीय सुरक्षा बैठकें कीं और कड़ा संदेश देते हुए कहा, “हम साज़िश करने वालों को ऐसी सजा देंगे जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी।”
गौरतलब है कि इससे पहले भी अक्टूबर 2022 में आयोजित ‘चिंतन शिविर’ में प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री ने सिविल डिफेंस को सशक्त और संगठित करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया था। यह मॉक ड्रिल, उस नीति-निर्देशन का अगला कदम मानी जा सकती है, जो देश को आतंकी हमलों और आपात स्थितियों के लिए तैयार और सजग बनाने की दिशा में उठाया गया है।
हर राज्य से मांगी जाएगी रिपोर्ट, सीमावर्ती क्षेत्रों पर विशेष जोर
जनवरी 2023 में केंद्रीय गृह सचिव द्वारा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे गए पत्र में पहले ही यह अपील की गई थी कि वे सीमावर्ती और तटीय इलाकों में सिविल डिफेंस क्षमताओं को मजबूत करें। अब उसी दिशा में आगे बढ़ते हुए गृह मंत्रालय ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि 7 मई की मॉक ड्रिल के बाद हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को एक “एक्शन टेकन रिपोर्ट” (ATR) सौंपनी होगी। इस रिपोर्ट में ड्रिल के दौरान किए गए कार्य, उससे मिली सीख, और भविष्य के लिए सुझाए गए सुधारात्मक कदम शामिल होंगे।
ड्रिल से पहले ही इसकी एक झलक पंजाब के फिरोजपुर छावनी में देखने को मिली, जहां भारत-पाकिस्तान सीमा के निकट 30 मिनट की ब्लैकआउट ड्रिल आयोजित की गई। यह अभ्यास बताता है कि सरकार संवेदनशील इलाकों में व्यावहारिक परीक्षणों और तत्परता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।





