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Thursday, March 19, 2026
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Chhath Travel Tips: बिहार से बाहर भी जलती आस्था की लौ, 5 राज्यों में बनता है अद्भुत दृश्य

छठ पूजा अब केवल बिहार तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि देशभर में, खासकर यूपी, दिल्ली, झारखंड, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में श्रद्धालुओं की भक्ति और उत्सव के रंगों के साथ मनाई जाती है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। छठ पूजा सिर्फ बिहार का धार्मिक पर्व नहीं रह गया है, बल्कि यह अब पूरे भारत में अपनी छाप छोड़ता सांस्कृतिक और पारंपरिक उत्सव बन चुका है। सूर्य देव और छठी माई की उपासना के साथ मनाया जाने वाला यह पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, जीवन में ऊर्जा और समृद्धि की कामना का प्रतीक है। बिहार के घाटों पर छठ पूजा का माहौल हर साल भक्तों की भक्ति और पारंपरिक लोकगीतों से झिलमिलाता है। अब यह पर्व बिहार से बाहर भी फैल चुका है, और देश के कई राज्यों में इसे बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

बिहार से बाहर छठ पूजा के प्रमुख राज्य

1. उत्तर प्रदेश: गंगा किनारे का दिव्य दृश्य

उत्तर प्रदेश में छठ पूजा का माहौल किसी लोक उत्सव से कम नहीं होता।

मुख्य स्थल: वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ (गोमती तट), अयोध्या (सरयू तट)

विशेषता: हजारों दीपों से सजी घाटियां, गंगा आरती की ध्वनि, लोक गीतों की मिठास और सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करने वाले व्रतियों की भक्ति।

वाराणसी और प्रयागराज के घाट पर श्रद्धालु उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं, जिससे पूरा वातावरण मंत्रमुग्ध कर देने वाला होता है।

2. दिल्ली: यमुना किनारे बिहारी संस्कृति की झलक

राष्ट्रीय राजधानी में छठ पूजा अब पूर्वांचल और बिहार की संस्कृति का जीवंत प्रतीक बन चुकी है।

मुख्य स्थल: कालिंदी कुंज, आईटीओ, मजनूं का टीला

विशेषता: कृत्रिम तालाबों और सजावट के जरिए बनाया गया माहौल ‘मिनी बिहार’ जैसा लगता है। यहां श्रद्धालु आधुनिक शहर की चहल-पहल के बीच सूर्य देव की आराधना करते हैं।

3. झारखंड: प्रकृति की गोद में भक्ति

झारखंड में छठ पूजा नदियों और झीलों के किनारे बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है।

मुख्य स्थल: जमशेदपुर (डोमुहानी घाट), रांची, हजारीबाग, धनबाद, बोकारो

विशेषता: सुवर्णरेखा और खरकाई नदियों के संगम पर दीपों की रौशनी में श्रद्धालु सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। यह दृश्य प्रकृति और भक्ति का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है।

4. पश्चिम बंगाल: हुगली तट पर उत्सव की रौनक

कोलकाता और आसपास के इलाकों में छठ पूजा पूर्वांचल और बंगाल की संस्कृतियों का मेल बन चुकी है।

मुख्य स्थल: कोलकाता (हुगली नदी तट)

विशेषता: नदी के किनारे दीपों की कतार, पारंपरिक गीत और उत्सवपूर्ण माहौल श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देता है। यहां छठ पूजा आस्था की भाषा से परे, भाव की पहचान बन जाती है।

5. महाराष्ट्र: मुंबई में सागर और सूर्य का संगम

महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी मुंबई में भी छठ पूजा की परंपरा मजबूती से कायम है।

मुख्य स्थल: जुहू चौपाटी, अरब सागर किनारा

विशेषता: समुद्र की लहरों के बीच सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते श्रद्धालुओं का दृश्य अद्भुत लगता है। मुंबई की विविध संस्कृति और छठ पूजा की भक्ति का यह संगम हर साल लाखों लोगों को मंत्रमुग्ध कर देता है।

छठ पूजा: एकता और संस्कृति का प्रतीक

छठ पूजा केवल बिहार का पर्व नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक एकजुटता और साझा परंपरा का प्रतीक बन चुका है। घाटों पर उमड़ती भीड़, पारंपरिक गीत और सूर्य उपासना का भाव यह संदेश देते हैं कि भारत की ताकत उसकी विविधता और आस्था में निहित है।आज देशभर में छठ पूजा भक्ति, प्रकृति और संस्कृति का संगम बनकर उभरती है, और हर जगह श्रद्धालु यही उद्घोष करते हैंजय छठी माई

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