नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। केंद्र सरकार ने सोमवार को सभी राज्यों को मंकी पॉक्स के सभी संदिग्ध मामलों की स्क्रीनिंग और टेस्ट कराने को लेकर एक एडवाइजरी जारी की है। सरकार ने केस को पता लगने पर उन्हें आइसोलेट करने और इसे और फैलने से रोकने के लिए कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग कराने के लिए कहा है। साथ ही सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि जनता के बीच इसको लेकर किसी तरह का डर ना फैलने पाए।
केंद्र सरकार ने कहा है कि अस्पतालों में Isolation centres स्थापित किए जाएं। उन्हें इस तरह से तैयार किया जाए कि संदिग्धों को वह लोग त्वरित तौर पर लेने में सक्षम हो जाएं।
क्या है मंकीपॉक्स
मंकीपॉक्स इस वायरस की पहचान वैज्ञानिकों ने पहली बार 1958 में की थी जब बंदरों में ‘पॉक्स जैसी’ बीमारी का प्रकोप हुआ था। एमपॉक्स वायरल संक्रमण है जो मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति या जानवर के साथ संपर्क में आने से फैलता है। एमपॉक्स एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रामक त्वचा या मुंह या जननांगों जैसे अन्य घावों के सीधे संपर्क के माध्यम से फैल सकता है।
लक्षण क्या होते हैं
संक्रमित लोगों के शरीर पर दाने हो जाते हैं। यह हाथ पैर, जननांगो के आसपास हो सकते हैं। इसमें आपके लिम्फ नोड्स में सूजन आ सकती है। संक्रमित व्यक्ति दाने निकलने और इसके ठीक होने तक कई लोगों को संक्रमित कर सकता है।
मंकीपॉक्स से बचाव
त्वचा या गुप्तांगों पर घाव वाले लोगों के करीब जाने से बचना चाहिए। इसके अलावा, बीमार लोगों द्वारा इस्तेमाल किए गए कपड़े, बिस्तर, या स्वास्थ्य संस्थानों में उपयोग की गई वस्तुओं से दूर रहना चाहिए। संक्रमित जंतुओं के संपर्क में आने से भी परहेज करें। मंकीपॉक्स के मामले सामने आए देशों में जाने से बचें और वहां से आए लोगों से कुछ समय तक दूरी बनाए रखें।
उल्लेखनीय है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 14 अगस्त को मंकीपॉक्स को ग्लोबल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है। केंद्र सरकार ने दुनिया में मंकीपॉक्स के बढ़ते मामलों के बीच 20 अगस्त को देश के सभी पोर्ट, एयरपोर्ट के साथ पाकिस्तान और बांग्लादेश से सटे बॉर्डर पर अलर्ट जारी किया था।





