नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । केंद्रीय कैबिनेट ने गुरुवार को देश में एक साथ चुनाव यानी ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल को मंजूरी दे दी। साथ ही अब सरकार इससे जुड़े दो बिल भी लोकसभा में पेश करने जा रही है। इसके बाद माना यही जा रहा है कि सरकार सोमवार को ये दोनों बिल लोकसभा में पेश कर सकती है। वहीं कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल सोमवार को संसद में वन नेशन वन इलेक्शन बिल पेश कर सकते है।
JPC के पास भेजा जाएगा बिल
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल सोमवार को लोकसभा में वन नेशन वन इलेक्शन बिल पेश करेंगे। गुप्त सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस बिल को पहले चर्चा और आम सहमति बनाने के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजना प्रस्ताविक है। जेपीसी के पास बिल जाने के बाद कमेटी सभी राजनीतिक दलों नेताओं संग चर्चा कर उस पर फिर कोई निर्णय लिया जा सकता है। अर्जुन राम मेघवाल आज भारत के संविधान में और संशोधन करने के लिए विधेयक पेश करने की अनुमति के लिए प्रस्ताव करेंगे।
संविधान में दो बड़े बदलाव जरुरी
सूत्रो के हवालों यह बताया गया है कि, इस बिल के जरिए संविधान में दो बड़े बदलाव किए जाने हैं, पहला संशोधन विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने से जुड़ा है, वहीं दूसरा विधेयक केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़ा है, जो कि दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी में विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने से संबंधित है। उल्लेखनीय है कि यह 129वां संविधान संशोधन होगा और केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के कानून बदल जाएंगे। सरकार एक देश, एक चुनाव से संबंधित जो दो विधेयक पेश करने जा रही है, वे केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 और संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 हैं ।
संविधान के 129वें संशोधन से होंगे ये बदलाव
सरकार अगले सप्ताह संसद में इस संबंधित विधेयक को पेश कर संविधान के चार अनुच्छेदों में संशोधन का प्रस्ताव रखेगी । ये चार धाराएं हैं 82ए, 83, 172 और 327। संविधान संशोधन विधेयक में नया अनुच्छेद 82ए (लोकसभा और सभी विधानसभाओं का एक साथ चुनाव) और अनुच्छेद 83 (संसद के सदनों का कार्यकाल), अनुच्छेद 172 (राज्य विधानमंडलों का कार्यकाल) और अनुच्छेद 327 (प्रस्तावना) में संशोधन शामिल हैं। संविधान के अनुच्छेद 327 में, ‘विभाजनों का परिसीमन’ शब्द को ‘एक साथ चुनाव कराना’ शब्दों से प्रतिस्थापित किया जाएगा।
केंद्र शासित प्रदेश सरकार अधिनियम में भी बदलाव
इस बीच, केंद्रीय मंत्री मेघवाल ने एक साथ चुनाव कराने के लिए केंद्र शासित प्रदेश सरकार अधिनियम, 1963 की धारा 5 और दिल्ली राजधानी क्षेत्र सरकार अधिनियम, 1991 की धारा 5 में संशोधन करने का प्रस्ताव दिया है। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 17 में भी संशोधन किया जाएगा ताकि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ हो सकें। विधेयक में 2034 के बाद एक साथ चुनाव होने की संभावना है।
विपक्ष लगातार हमलावर
विपक्ष के कई नेताओं ने ‘One Nation One Election प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए सरकार पर लगातार हमला कर रहे हे। वहीं वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर तंज कसते हुए कहा कि, कोई राज्य सरकार अगर 6 महीने में अपना विश्वास खो देती है या अल्पमत में आ जाती है तो क्या राज्य को बचे 4.5 साल बिना सरकार का रह सकते है। वहीं इस प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने भी सरकार से मांग की है कि इस विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति को भेजने का निवेदश की है। उन्होनें कहा कि, यह विधेयक देश के लोकतंत्र को कमजोर करेगा। जयराम रमेश ने कहा कि यह विधेयक संसद में पेश किया जाएगा और हम चाहते हैं कि इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा जाए, जो इस पर चर्चा करेगी।
इस संबंध में बताते चले कि सरकार ने कहा कि साल 1951-52, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के आम चुनाव एक साथ हुए थे। हालांकि 1968 और 1969 में कई विधानसभाओं के समय से पहले भंग होने के कारण एक साथ लोकसभा चुनाव कराने का चक्र बाधित हो गया था। एक साथ चुनाव कराने के लिए दो सितंबर 2023 को पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया था। विचार-विमर्श और जांच के बाद समिति ने एक साथ चुनाव कराने के लिए 14 मार्च, 2024 को राष्ट्रपति को अपनी सिफारिशें सौंपी थीं।





