नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पूर्व भाजपा सांसद और जनप्रतिनिधि बृजभूषण शरण सिंह ने एक बार फिर 2029 लोकसभा चुनाव को लेकर बड़ा बयान देकर सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है। अयोध्या से चुनाव लड़ने की अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि उनकी खुद की ऐसी कोई मंशा नहीं है, लेकिन राजनीति में कई बार जनता का दबाव नेताओं को फैसले लेने पर मजबूर कर देता है।
”अगर जनता चाहेगी तो चुनाव भी लड़ा जाएगा”
एक चर्चित अखबार से बातचीत में बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि अगर 2029 में वह और उनके बेटे कैसरगंज सांसद करणभूषण सिंह दोनों भाजपा टिकट पर चुनाव जीतकर संसद पहुंचते हैं, तो इसमें किसी को आपत्ति क्यों होनी चाहिए। चुनाव लड़ना हर नागरिक का अधिकार है और किसे संसद भेजना है, यह फैसला जनता करती है। अगर जनता चाहेगी तो चुनाव भी लड़ा जाएगा।
”जनता कई बार नेताओं को छोड़ने नहीं देती”
अयोध्या से चुनाव लड़ने के सवाल पर बृजभूषण ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जिक्र करते हुए कहा कि जैसे अटल जी कहा करते थे कि वह राजनीति छोड़ना चाहते हैं, लेकिन राजनीति उन्हें नहीं छोड़ती, ठीक वैसे ही जनता कई बार नेताओं को छोड़ने नहीं देती। उन्होंने दावा किया कि समय आने पर लोकसभा चुनाव से पहले जुलूस निकल सकता है और जनता खुद मांग कर सकती है कि वह किसी भी सीट से चुनाव लड़ें।
AQI को लेकर सरकार ही नहीं जिम्मेदार
देश में बढ़ते वायु प्रदूषण और खराब AQI पर बोलते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि यह केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह एक मानव निर्मित समस्या है। उन्होंने कहा कि दिल्ली समेत कई राज्यों में प्रदूषण के लिए किसानों की पराली जलाने की समस्या पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। उनका तर्क था कि एक ईंट भट्ठा साल भर में जितना धुआं छोड़ता है, उतना धुआं एक एकड़ पराली जलाने से निकल जाता है।
राहुल गांधी की निगरानी वाले बयान पर प्रतिक्रिया
उन्होंने नियमों पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदूषण प्रमाणपत्र होने के बावजूद उनकी गाड़ी दिल्ली में नहीं चल सकती, जबकि असली समस्या कहीं और है। बृजभूषण ने कहा कि नियम से लेकर लेखपाल स्तर तक के अधिकारी इस पूरे सिस्टम के लिए जिम्मेदार हैं और किसानों को जागरूक करने की सख्त जरूरत है।
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि यह सवाल पूरी तरह निराधार नहीं है
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के इस बयान पर कि सरकार उनकी लोकेशन पर नजर रखती है, बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि यह सवाल पूरी तरह निराधार नहीं है। विपक्ष के बड़े नेता होने के नाते उनकी गतिविधियों पर नजर होना सुरक्षा कारणों से भी संभव है। आज के सोशल मीडिया और मोबाइल के दौर में कोई भी यह दावा नहीं कर सकता कि वह किसी की नजर से पूरी तरह बचा हुआ है।
ब्राह्मण नेताओं की बैठक पर भी बोले
यूपी में ब्राह्मण नेताओं की बैठक को लेकर उठे सवालों पर बृजभूषण ने कहा कि इसमें कोई गलत बात नहीं है। अगर किसी समाज के लोग बैठकर आपस में चर्चा करते हैं तो उसे गलत नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। इससे पहले क्षत्रिय समाज की बैठक भी हुई थी और उस पर कोई विवाद नहीं हुआ।
इस तरह बृजभूषण शरण सिंह के बयानों ने न सिर्फ 2029 लोकसभा चुनाव को लेकर सियासी चर्चाओं को तेज कर दिया है, बल्कि प्रदूषण, निगरानी और सामाजिक बैठकों जैसे मुद्दों पर भी नई बहस छेड़ दी है।





