नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। आज 14 फरवरी 2026 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा आतंकी हमले के सात साल पूरे हो गए हैं। 14 फरवरी 2019 को Pulwama में जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर CRPF के काफिले पर बड़ा आत्मघाती हमला हुआ था। उस दिन 78 गाड़ियों के काफिले में 2,500 से ज्यादा जवान सफर कर रहे थे। विस्फोटकों से भरी SUV एक बस से टकरा गई, जिसमें Central Reserve Police Force (CRPF) के 40 जवान शहीद हो गए और 35 से अधिक घायल हुए। आज देशभर में शहीदों को श्रद्धांजलि दी जा रही है। लेटपोरा स्थित CRPF कैंप में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया है।
घाटी में कड़ी सुरक्षा, हाई अलर्ट जारी
हमले की बरसी को देखते हुए जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। श्रीनगर और अन्य संवेदनशील इलाकों में सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ाई गई है। जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य एजेंसियां लगातार सरप्राइज चेकिंग कर रही हैं। खुफिया एजेंसियों को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी जिम्मेदारी
इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन Jaish-e-Mohammed ने ली थी। हमलावर की पहचान आदिल अहमद डार के रूप में हुई थी। इस घटना के बाद पूरे देश में शोक और गुस्से की लहर दौड़ गई थी। पुलवामा हमले के जवाब में 26 फरवरी 2019 को Indian Air Force ने पाकिस्तान के बालाकोट में एयरस्ट्राइक की थी। इस कार्रवाई में उन ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिन्हें आतंकी प्रशिक्षण शिविर बताया गया था। इस घटना के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया था।
सुरक्षा एजेंसियों में बड़े बदलाव
पुलवामा हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए। जवानों को बेहतर बुलेटप्रूफ जैकेट और आधुनिक हथियार दिए गए। खुफिया समन्वय (इंटेलिजेंस कोऑर्डिनेशन) मजबूत किया गया। हाईवे मूवमेंट और काफिला प्रबंधन में नए प्रोटोकॉल लागू किए गए। सरकार का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को और मजबूत किया गया है। पुलवामा हमला देश के लिए एक काला दिन माना जाता है। हर साल 14 फरवरी को ‘ब्लैक डे’ के रूप में शहीद जवानों के बलिदान को याद किया जाता है।





