नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। आज, 2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के साथ-साथ भारत के तीसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की भी जयंती मनाई जा रही है। शास्त्री जी का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय (अब पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर) में हुआ था। उनकी सादगी, ईमानदारी और देश के लिए समर्पण आज भी मिसाल हैं।
‘जय जवान, जय किसान’ का दिया अमर नारा
1965 के भारत-पाक युद्ध में शास्त्री जी का नेतृत्व देश के लिए यादगार रहा। इसी दौरान उन्होंने किसानों और सैनिकों का मनोबल बढ़ाने के लिए नारा दिया, “जय जवान, जय किसान”। यह नारा आज भी हर भारतीय के दिल में गूंजता है।
बेटे का प्रमोशन रुकवाया, दिखाई ईमानदारी
प्रधानमंत्री रहते हुए शास्त्री जी ने अपने बेटे का प्रमोशन रुकवा दिया था। उन्हें पता चला कि बेटे को अनुचित तरीके से तरक्की दी गई है। शास्त्री जी ने तुरंत आदेश देकर पदोन्नति वापस करा दी। यह उनका ऐसा फैसला था जिसने देश को दिखा दिया कि उनके लिए ईमानदारी रिश्तों से भी ऊपर है।
ट्रैफिक जाम में भी नहीं लिया VIP होने का फायदा
एक बार गृह मंत्री रहते हुए शास्त्री जी को फ्लाइट पकड़ने में देर हो रही थी। ट्रैफिक जाम में फंसे तो पुलिस ने रास्ता साफ करने के लिए सायरन का इस्तेमाल करने की सलाह दी। लेकिन शास्त्री जी ने मना कर दिया और कहा कि आम लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए। 1965 के युद्ध के दौरान जब खाद्यान्न संकट हुआ तो शास्त्री जी ने अपने परिवार से कहा कि वे दिन में केवल एक ही वक्त खाना खाएं। उन्होंने खुद भी यही नियम अपनाया और देशवासियों से भी इसकी अपील की है। लाल बहादुर शास्त्री कद में भले छोटे थे, लेकिन उनके विचार और फैसले हमेशा बड़े रहे। उनकी ईमानदारी और सादगी ने उन्हें जनता का सच्चा नेता बनाया।





