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Friday, March 20, 2026
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CJI चंद्रचूड़ के कार्यकाल के आखिरी दिन सुनाया गया बड़ा फैसला, अभी के लिए AMU का अल्पसंख्यक दर्जा रहेगा बरकरार

सुप्रीम कोर्ट में AMU के मुद्दे को लेकर 7 जजों की पीठ में से CJI समेत चार जजों जस्टिस संजीव खन्ना, जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा का फैसला एकमत है।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। देश के सर्वोच्च न्यायालय ने आज अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय(AMU) पर अपना बड़ा फैसला सुनाया।सुप्रीम कोर्ट ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे को अभी के लिए बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मुद्दे को लेकर 7 जजों की पीठ में से CJI समेत चार जजों जस्टिस संजीव खन्ना, जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा का फैसला एकमत है। जबकि सूर्यकांत, दीपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा का फैसला अलग है।

AMU के दर्जे को लेकर 3 जजों की बेंच का गठन करने का फैसला

मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को संविधान के आर्टिकल 30 के तहत अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त है या नहीं इस पर फैसला सुनाया है। आर्टिकल 30 धार्मिक और भाषायी अल्पसंख्यकों को शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने के साथ साथ उसके प्रशासन का अधिकार भी प्रदान करता है।

मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के दर्जे को लेकर 3 जजों की बेंच का गठन करने का फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट के 3 जजों की बेंच अब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के दर्जे के निधारण को लेकर सुनवाई करेगी। 

1 फरवरी 2024 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था

मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 8 दिन तक इस मामले में दलीलें सुनने के बाद 1 फरवरी 2024 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 1 फरवरी 2024 को कहा था कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अधिनियम में 1981 के संशोधन ने सिर्फ आधे- अधूरे मन से ही काम किया और संस्थान को 1951 से पहले की स्थिति में बहाल नहीं किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वर्ष 1981 के संशोधन ने इसे प्रभावी रूप से अल्पसंख्यक का दर्जा दिया था।  

CJI डीवाई चंद्रचूड़ 10 नवंबर 2024 को रिटायर हो रहे हैं

मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, 5 नवंबर 2024 को इस मामले में केंद्र सरकार की और से बहस करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि देश के सर्वोच न्यायालय को ध्यान देना चाहिए कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का गठन 1920 के एक्ट से हुआ था। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय न तो अल्पसंख्यक द्वारा स्थापित किया गया था और न ही अल्पसंख्यक द्वारा ये प्रशासित होता है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने AMU पर संविधान सभा की बहस का जिक्र भी किया था और कहा था कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है बल्कि राष्ट्रीय महत्व का देश का एक बेहतरीन संस्थान है। बता दें कि CJI डीवाई चंद्रचूड़ 10 नवंबर 2024 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। आज CJI डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे को अभी के लिए बरकरार रखने का बड़ा फैसला सुना दिया है।

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