नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में सोमवार को नवाब अब्दुल समद के मकबरे को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। हिंदू संगठनों ने दावा किया कि यह जगह असल में हजारों साल पुराना भगवान शिव और श्रीकृष्ण का मंदिर है, जिसे बाद में मकबरे का रूप दिया गया। इसी दावे के बाद सैकड़ों लोग पूजा-पाठ करने और ‘मंदिर’ को पुनः स्थापित करने के लिए यहां पहुंचे, लेकिन मामला बवाल में बदल गया।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
कुछ दिन पहले बीजेपी जिलाध्यक्ष ने इस मकबरे को शिव और ठाकुर जी का प्राचीन मंदिर बताते हुए आरोप लगाया था कि मंदिर की संरचना बदलकर मकबरा बना दिया गया। उन्होंने यहां मौजूद कमल के फूल और त्रिशूल के निशान को मंदिर होने का सबूत बताया। यह बयान सामने आने के बाद हिंदू संगठनों में नाराज़गी बढ़ी और सोमवार को बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंच गए।
मकबरे में तोड़फोड़ और झड़प
मौके पर पहुंची भीड़ ने मकबरे के अंदर बनी मजार पर तोड़फोड़ की। पुलिस ने भीड़ को रोकने की कोशिश की, लेकिन लोग बैरिकेडिंग तोड़कर अंदर घुस गए। इस दौरान पुलिस और भीड़ के बीच धक्का-मुक्की हुई। स्थिति बिगड़ने पर मुस्लिम समुदाय के लोग भी वहां जमा हो गए। दोनों पक्षों में तनाव बढ़ा और पथराव की घटनाएं हुईं। घटना की जानकारी मिलते ही डीएम और एसपी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन ने कहा है कि किसी को भी कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। तोड़फोड़ और पथराव के बाद फतेहपुर के इस इलाके में माहौल तनावपूर्ण है। पुलिस ने भीड़ को हटाने और शांति बहाल करने की कोशिशें तेज कर दी हैं। दोनों समुदायों से अपील की जा रही है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखें।




