नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । संसद के मानसून सत्र से ठीक एक दिन पहले केंद्र सरकार ने 20 जुलाई 2025 को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सत्र के दौरान संसद के कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करना और विपक्षी दलों से सहयोग सुनिश्चित करना है।
सरकार की ओर से बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू सहित कई वरिष्ठ मंत्री भाग लेंगे। इसके साथ ही एनडीए के सहयोगी दलों और विपक्षी पार्टियों के नेता व संसदीय दलों के प्रमुख भी बैठक में शिरकत करेंगे। जानकारों का मानना है कि सत्र के दौरान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और बिहार में SIR योजना जैसे संवेदनशील मुद्दों को लेकर संसद में तीखी बहस और हंगामे के आसार हैं।
मानसून सत्र में केंद्र सरकार पेश करेगी आठ नए विधेयक
सोमवार, 21 जुलाई 2025 से शुरू होने जा रहे मानसून सत्र में केंद्र सरकार आठ नए विधेयकों को संसद में पेश करने की योजना बना रही है। इन विधेयकों में भू-विरासत स्थलों और भू-अवशेषों के संरक्षण एवं सुरक्षा से जुड़ा एक अहम विधेयक भी शामिल है। सरकार जिन विधेयकों को सत्र में लाने की तैयारी कर रही है, उनमें प्रमुख हैं – राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक, भू-विरासत स्थल और भू-अवशेष (संरक्षण और रखरखाव) विधेयक, खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, राष्ट्रीय डोपिंग रोधी (संशोधन) विधेयक।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ और बिहार के SIR मुद्दे पर गरमा सकता है सियासी माहौल
संसद का मानसून सत्र ऐसे समय शुरू हो रहा है, जब बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन (SIR) को लेकर सियासत अपने चरम पर है। 12 अगस्त से 18 अगस्त तक रक्षाबंधन और स्वतंत्रता दिवस समारोह के चलते सत्र में अवकाश रहेगा, लेकिन उससे पहले ही संसद में हलचल तेज रहने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर SIR प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि सदन में बीजेपी और विपक्षी ‘इंडिया गठबंधन’ के बीच तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिल सकते हैं। साथ ही, विपक्ष सरकार से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्धविराम की मध्यस्थता के दावे पर भी जवाब मांगने की तैयारी में है। इन संवेदनशील मुद्दों पर सदन में जोरदार बहस होने की संभावना है।
इस सत्र में सरकार द्वारा आयकर विधेयक, 2025 को भी दोबारा पेश किए जाने की उम्मीद है। यह विधेयक फरवरी में लोकसभा में लाया गया था और इसके बाद इसे निचले सदन की प्रवर समिति को सौंपा गया है।




