नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क। कर्नाटक में कांग्रेस सरकार का आधा कार्यकाल नवंबर 2025 में पूरा हो चुका है, जिससे पार्टी में सत्ता परिवर्तन के कयास लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इस बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच नेतृत्व की खींचतान ने राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। कांग्रेस के कई कार्यकर्ता असमंजस में हैं, वहीं हाई कमान का पूरा फोकस पार्टी की एकता बनाए रखने पर है। अब सवाल यही है कि 29 जनवरी को दिल्ली बुलाए जाने वाला समन इस टकराव को खत्म करेगा या नया राजनीतिक ड्रामा शुरू करेगा?
यह बुलावा डीके शिवकुमार के हालिया दिल्ली दौरे के बाद आया
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस हाई कमान 29 जनवरी को दिल्ली में दोनों नेताओं की बैठक बुला सकता है। इस बैठक में लंबे समय से चल रहे नेतृत्व संघर्ष पर अंतिम फैसला किया जा सकता है। खास बात यह है कि यह बुलावा डीके शिवकुमार के हालिया दिल्ली दौरे के बाद आया है, जहां उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की थी। डीके ने अपने इस दौरे के दौरान दावोस यात्रा को रद्द कर 48 घंटे दिल्ली में ही बिताए और राहुल गांधी समेत सीनियर नेताओं से चर्चा की। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि समय सब बताता है, लेकिन बैठक की डिटेल्स साझा करने से इंकार कर दिया।
मुख्यमंत्री परिवर्तन करना आसान नहीं माना जाता
सूत्र बताते हैं कि बैठक में 2023 के पावर शेयरिंग फॉर्मूला और पिछले तीन महीनों में हुए घटनाक्रमों पर चर्चा हो सकती है। वहीं दूसरी ओर, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने फाइनेंस विभाग के अधिकारियों के साथ प्री-बजट बैठक बुलाई है। मार्च में बजट पेश होना है, लेकिन राजनीतिक सर्कल्स में यह मीटिंग डीके को काउंटर करने की रणनीति के रूप में देखी जा रही है। विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम मुख्यमंत्री की स्थिति मजबूत करने की कोशिश माना जा रहा है, क्योंकि 22 से 31 जनवरी तक विधानसभा सत्र चल रहा है और इस दौरान मुख्यमंत्री परिवर्तन करना आसान नहीं माना जाता।
अब पार्टी स्पष्टता देने के लिए तैयार है
कांग्रेस हाई कमान में मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी शामिल हैं, और अब पार्टी स्पष्टता देने के लिए तैयार है। खड़गे पहले ही कह चुके हैं कि जरूरत पड़ी तो बैठक बुलाई जाएगी। इसी बीच यह टकराव प्रशासन पर भी असर डाल रहा है, जैसा कि PWD मंत्री सतीश जारकीहोली ने भी स्वीकार किया है।
दिलचस्प बात यह है कि 29 जनवरी की बैठक इंडियन इकोनॉमिक सर्वे के साथ भी जुड़ी हुई है, इसलिए राजनीतिक निर्णय और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि फैसला जल्द आएगा चाहे मौजूदा नेतृत्व जारी रहे या बदलाव हो।
कांग्रेस में 29 जनवरी का दिन निर्णायक माना जा रहा
कुल मिलाकर कर्नाटक कांग्रेस में 29 जनवरी का दिन निर्णायक माना जा रहा है। अगर हाई कमांड ने सिद्धारमैया को ही आगे रखा, तो डीके शिवकुमार की राजनीतिक महत्वाकांक्षा प्रभावित हो सकती है। वहीं, यदि डीके को मौका मिलता है, तो यह कांग्रेस के भीतर नए समीकरणों को जन्म देगा। अब देखना यह है कि 29 जनवरी का समन टसल को खत्म करता है या नया राजनीतिक तूफान शुरू करता है।




