नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद बरेली में भड़क उठी हिंसा के पीछे बड़ा राज सामने आया है। जिसमें पुलिस जांच में पता चला है कि,यह हिंसा अचानक नहीं हुई, बल्कि पांच दिन से साजिश के तहत इसकी तैयारी चल रही थी। प्रदर्शन के दौरान हुए पथराव और फायरिंग में पुलिस के 10 जवान घायल हो गए, जबकि कई उपद्रवियों की पहचान CCTV फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के आधार पर की जा रही है।
हिंसा भड़की नहींं भड़काई गई?
पुलिस सूत्रों का कहना है कि शुक्रवार को नमाज के बाद कुछ लोग “आई लव मोहम्मद” के नारे लगाते हुए प्रदर्शन कर रहे थे। लेकिन इसके साथ ही कुछ असामाजिक तत्वों ने माहौल खराब कर दिया। पुलिस ने बताया कि करीब 90 से 95 प्रतिशत लोग नमाज शांतिपूर्ण तरीके से अदा कर गए, लेकिन शेष कुछ ने हिंसा भड़काई। पथराव और फायरिंग के साथ ही पुलिस पर भी हमला हुआ, जिसे नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा।
CCTV फुटेज की मदद से उपद्रवियों का पता लगा रहा है प्रशासन
अधिकारियों ने खुलासा किया है कि प्रदर्शन को संगठित करने वालों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत सख्त कार्रवाई की तैयारी है। इस कानून के अंतर्गत आरोपी बिना किसी वारंट के गिरफ्तार किए जा सकते हैं और लंबी अवधि तक हिरासत में रखे जा सकते हैं। पुलिस ने कहा है कि अब तक कई संदिग्धों की पहचान कर उनकी कॉल डिटेल्स खंगाली जा रही हैं और CCTV फुटेज की मदद से उपद्रवियों का पता लगाया जा रहा है।पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें और कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें। बरेली प्रशासन ने भी इस मामले को लेकर अलर्ट जारी कर दिया है।
क्या है NSA?
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) सरकार को बिना वारंट के किसी भी व्यक्ति को पकड़ने और उसे कुछ समय तक हिरासत में रखने का अधिकार देता है। इसे तब लागू किया जाता है जब किसी की गतिविधि राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक शांति के लिए खतरा मानी जाती है।
बरेली में शांति व्यवस्था बनाए रखने पुलिस चौकस है
यह घटना बरेली में कानून व्यवस्था की चुनौती के रूप में सामने आई है, जहां पुलिस और प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है। जल्द ही दोषियों को कठोर सजा दिलाने के लिए पुलिस पूरी ताकत झोंक रही है। बरेली में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस चौकस है और संदिग्धों पर नजर रखे हुए है। आगामी दिनों में और भी खुलासे होने की संभावना है।




