नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। वृंदावन स्थित प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर को केंद्र सरकार से FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम, 2010) का लाइसेंस मिल गया है। इसका मतलब है कि अब विदेशी भक्त भी खुलकर दान दे सकेंगे, और इन दानों का उपयोग मंदिर के विकास और संचालन में किया जा सकेगा।
कोर्ट से मिली मंजूरी
बांके बिहारी मंदिर का प्रबंधन वर्तमान में कोर्ट द्वारा गठित प्रबंधन समिति द्वारा किया जा रहा है। इस समिति ने सरकार से विदेशी दान लेने के लिए आवेदन किया था, जिसे अब मंजूरी मिल गई है। पहले मंदिर का प्रबंधन पुजारियों के परिवारों द्वारा किया जाता था, लेकिन अब कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद यह कार्य समिति को सौंपा गया है। मंदिर के खजाने में बड़ी मात्रा में सोना, चांदी और कीमती आभूषण मौजूद हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मंदिर के पास वर्तमान में लगभग 480 करोड़ रुपये का फंड है, जिसमें विदेशी भक्तों द्वारा दिया गया धन भी शामिल है। इस धनराशि के सही उपयोग और विदेशी दान की अनुमति के लिए FCRA रजिस्ट्रेशन अनिवार्य था।
मंदिर का खजाना
मंदिर के खजाने में बड़ी मात्रा में सोना, चांदी और कीमती आभूषण मौजूद हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मंदिर के पास वर्तमान में लगभग 480 करोड़ रुपये का फंड है, जिसमें विदेशी भक्तों द्वारा दिया गया धन भी शामिल है। इस धनराशि के सही उपयोग और विदेशी दान की अनुमति के लिए FCRA रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा।
क्या है FCRA और क्यों है जरूरी?
FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम, 2010) के तहत, भारत में किसी भी धार्मिक या सामाजिक संस्था को विदेशों से धन प्राप्त करने के लिए सरकारी अनुमति लेनी होती है। विदेशी फंड का सही इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाता है। दान की पारदर्शिता बनी रहती है। विदेशी चढ़ावे को मंदिर के विकास कार्यों में उपयोग किया जा सकता है।
मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
बांके बिहारी मंदिर लगभग 550 साल पुराना है और इसकी स्थापना प्रसिद्ध संत स्वामी हरिदास जी ने की थी। यह मंदिर सेवायत गोस्वामी और सारस्वत ब्राह्मण परिवारों द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी संचालित होता आ रहा था।
अब विदेशी भक्त भी खुलकर कर सकेंगे दान
FCRA लाइसेंस मिलने के बाद अब बांके बिहारी मंदिर को विदेशों से बिना किसी अड़चन के दान मिल सकेगा। इससे मंदिर के विस्तार, सुविधाओं और भक्तों के लिए बेहतर व्यवस्था की जा सकेगी। मंदिर समिति के अनुसार, इस लाइसेंस से श्रद्धालुओं की भागीदारी बढ़ेगी और मंदिर में धार्मिक गतिविधियों का विस्तार होगा। बांके बिहारी मंदिर को FCRA लाइसेंस मिलने के बाद अब मंदिर की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी। विदेशी भक्त भी अब खुले दिल से अपने श्रद्धा भाव को व्यक्त कर सकते हैं, जिससे मंदिर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को और अधिक मजबूती मिलेगी।




