नई दिल्ली, रफ्तार न्यूजः अयोध्या गैंगरेप पीड़िता को रविवार को ही लखनऊ शिफ्ट किया गया था औऱ KGMU में मंगलवार को अबॉर्शन कराया गया। फिलहाल पीड़िता की हालत स्थिर है। पुलिस ने इस मामले के दोषी को सजा दिलाने के लिए अस्पताल में DNA टेस्ट के लिए पीड़िता के भ्रूण का सैंपल लिया गया ताकि आरोपि का DNA मैच कराया जा सके।
अस्पताल में डॉक्टरों की एक टीम पीड़िता की जांच में लगी हुई है। इस मामले पर KGMU के प्रशासन ने कुछ भी बोलने से मना कर दिया है। सूत्रों और पीड़िता की मां ने मंगलवार को अबॉर्शन होने का कन्फर्मेशन दिया है।
पीड़ित की उम्र 18 साल से कम थी और उसको 18 साल का गर्भ था और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक के मुताबिक 24 सप्ताह तक का गर्भपात किया जा सकता है इसलिए पीड़िता के अबॉर्शन में किसी भी तरह की कानूनी अड़चन नहीं आइ।
अयोध्या गैंगरेप मामले के दोनो आरोपी भदरसा में समाजवादी पार्टी नेता मोईद खान और उसके नौकर राजू खान जेल में बंद है। इन पर आरोप है कि दोनो में पीड़िता को बेकरी में नशिला बिस्किट खिलाकर बेहोश कर दिया और फिर उसके साथ दुष्कर्म किया। दोनो ने पीड़िता का वीडियो भी बना लिया जिसको दिखाकर पीड़िता को बैल्कमेल कर कई हैवानियत की। जब पीड़िता गर्भवती हो गई तो मामले का खुलासा हुआ फिर पुलिस ने 30 जुलाई को मामला दर्ज किया इसके बाद जिला प्रशासन ने मोईद खान के खिलाफ बुलडोजर एक्शन भी शुरु किया उसकी बेकरी को बुलडोजर से गिरा दिया गया।
इस मामले में जमकर राजनीति हो रही है समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मामले की DNA जांच की माग की थी। ये मामला गैंगरेप से जुड़ा है। ऐसे में सवाल उठ रहे है कि क्या DNA मैच हो सकता है औऱ दूसरे आरोपी का DNA मैच न होने पर वह बच सकता है या नहीं?
कानून के जानकारों का कहना है कि DNA मैच न होमे पर भी आरोपी का बचना मुश्किल है क्योकि मामला दुष्कर्म से जुड़ा है और ऐसे में अन्य साक्ष्यों के आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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