नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। असम के मुख्यमंत्री हिमन्त बिस्वा सरमा ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी भाजपा को मियाँ मुसलमानों का वोट नहीं मिलेगा, जबकि असमिया मुसलमानों का समर्थन उन्हें प्राप्त होगा।
कौन होते हैं मियाँ मुसलमान?
मियाँ मुसलमान शब्द उस बंगाली-भाषी मुसलमान समुदाय के लिए इस्तेमाल होता है, जिनके पूर्वज 19वीं सदी के अंत या 20वीं सदी की शुरुआत में पूर्वी बंगाल आज-का बांग्लादेश से असम आए थे। सरमा ने कहा कि उन्हें नियमित रूप से संदिग्ध नागरिक या घुसपैठिए के रूप में देखा गया है। हिमंता बिस्वा सरमा के मुताबिक, डिलीमिटेशन के बाद असम में लगभग 10-15 नई विधानसभा सीटें बनी हैं, जिससे भाजपा एवं उसके सहयोगियों के लिए रणनीति बदल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जनसंख्या पैटर्न के आधार पर भाजपा की पहुँच लगभग 103 सीटों तक सीमित रहने की संभावना है।
जनगणना में मियाँ मुसलमान की हो सकती है बढ़ोतरी
हिमंता बिस्वा सरमा के मुताबिक, डिलीमिटेशन के बाद असम में लगभग 10-15 नई विधानसभा सीटें बनी हैं, जिससे भाजपा एवं उसके सहयोगियों के लिए रणनीति बदल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जनसंख्या पैटर्न के आधार पर भाजपा की पहुँच लगभग 103 सीटों तक सीमित रहने की संभावना है। सरमा ने प्रकाश डाला है कि मियाँ मुसलमान अगले जनगणना में असम की आबादी का लगभग 38% हिस्सेदार बन सकते हैं। उनकी इस बात ने राज्य में जनसांख्यिकीय बदलाव, वोटर पैटर्न, और चुनावी रणनीतियों पर नई बहस छेड़ दी है। विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान सिर्फ वोट-रुझानों को नहीं, बल्कि असम में मौजूद पहचान, भाषा, प्रवास और नागरिकता के संवेदनशील मुद्दों को भी उजागर करता है।
कोर कमेटी की मीटिंग के बाद समझाया सीट-शेयरिंग फॉर्मूला
गुवाहाटी में BJP की स्टेट कोर कमेटी की मीटिंग के बाद रिपोर्टर्स से बात करते हुए, हिमंता बिस्वा सरमा ने सीट-शेयरिंग फॉर्मूला समझाते हुए कहा कि जिन सीटों पर चुनाव लड़ा जा सकता है, वे राज्य के पॉपुलेशन पैटर्न को दिखाती हैं, जो उनके मुताबिक नैचुरली BJP के जीतने की संभावना को कम करता है। उन्होंने कहा कि BJP ने हमेशा युवाओं को मौके दिए हैं और हर चुनाव में नए उम्मीदवारों को मौका दिया जाता है और इस बार डिलिमिटेशन की वजह से उनके पास बेहतर मौका है, जिससे नए चुनाव क्षेत्र बने हैं।





