नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सरकारी कर्मचारियों के लिए एक ऐतिहासिक और बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने साफ किया कि असम देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने 8वां स्टेट पे कमीशन गठित किया है। यह कदम कर्मचारियों के कल्याण, उनके आर्थिक सुरक्षा और जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इसे असम की संवेदनशील और प्रगतिशील शासन प्रणाली का प्रतीक भी बताया।
‘राज्य की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाते हैं’
सीएम सरमा ने कहा कि असम सरकार अपने कर्मचारियों की इकोनॉमिक सिक्योरिटी, सम्मान और समग्र कल्याण के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 8वें राज्य वेतन आयोग का उद्देश्य केवल वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें कर्मचारियों के भत्तों, पेंशन और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सिफारिशें दी जाएंगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रेरित और सुरक्षित कर्मचारी ही राज्य की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाते हैं।
असम पहला राज्य होगा जहां 8वें राज्य वेतन आयोग का गठन हुआ
मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर पोस्ट करते हुए लिखा, असम देश का पहला राज्य होगा जो 8वें राज्य वेतन आयोग का गठन करेगा। यह कर्मचारी कल्याण और प्रगतिशील शासन की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आयोग की सिफारिशें समय पर लागू की जाएंगी, ताकि कर्मचारियों को इसका वास्तविक लाभ मिल सके।
पूरे देश में अन्य राज्यों के लिए भी प्रगतिशील मॉडल पेश कर रहा है
स्टेट पे कमीशन में शामिल कर्मचारियों में राज्य के सरकारी विभागों के स्टाफ, राज्य पुलिस, राज्य सरकार द्वारा संचालित संस्थानों के कर्मचारी और पेंशनधारी शामिल होते हैं। कमीशन का काम इनके पे स्केल, भत्ते और पेंशन को निर्धारित करना है। इस ऐतिहासिक कदम के साथ असम न केवल अपने कर्मचारियों के अधिकारों और कल्याण के लिए एक उदाहरण स्थापित कर रहा है, बल्कि पूरे देश में अन्य राज्यों के लिए भी प्रगतिशील मॉडल पेश कर रहा है।





