नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने अभी से अपनी रणनीति तेज कर दी है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव 28 मार्च को नोएडा में बड़ी PDA भागीदारी रैली के साथ चुनावी कैंपेन की शुरुआत करेंगे। पार्टी इसे पश्चिमी यूपी में अपने संगठन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मान रही है।
नोएडा से क्यों शुरू हो रहा चुनावी अभियान?
समाजवादी पार्टी ने इस बार चुनावी अभियान की शुरुआत उसी इलाके से करने का फैसला किया है, जहां पिछली बार उसका प्रदर्शन कमजोर रहा था। 2022 विधानसभा चुनाव में गौतमबुद्धनगर जिले की सभी सीटें बीजेपी ने जीती थीं और सपा को यहां एक भी सीट नहीं मिली थी। अब पार्टी कमजोर सीटों पर ज्यादा फोकस करके माहौल बदलने की कोशिश में है।
PDA फॉर्मूला और टिकट वितरण पर हो सकती है घोषणा
28 मार्च की रैली में सपा अपने PDA पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक फॉर्मूले को और विस्तार से सामने रख सकती है। माना जा रहा है कि पार्टी चुनावी रणनीति और टिकट वितरण के संकेत भी इसी मंच से दे सकती है।पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यादव वोटरों की संख्या अपेक्षाकृत कम मानी जाती है। यहां गुर्जर, मुस्लिम और दलित वोटबैंक मजबूत है। सपा की कोशिश इन वर्गों को साथ लाकर अपने PDA समीकरण को मजबूत करने की है। मार्च के पहले हफ्ते में दादरी में गुर्जर सम्मेलन की भी तैयारी की जा रही है, जिसमें कई विधानसभा क्षेत्रों से लोगों के शामिल होने का दावा है।
गुर्जर और मुस्लिम वोटबैंक पर खास नजर
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि गुर्जर समाज के कुछ हिस्सों में सरकार से नाराजगी की बात कही जा रही है। सपा इसी मुद्दे को भुनाने की रणनीति बना रही है। वहीं मुस्लिम वोटर पहले से ही पार्टी के मजबूत समर्थक माने जाते हैं, इसलिए PDA रैली के जरिए इन्हें एकजुट करने की कोशिश होगी। समाजवादी पार्टी का मानना है कि लोकसभा चुनाव में PDA फॉर्मूले से उसे फायदा हुआ था। अब पार्टी इसी रणनीति को 2027 विधानसभा चुनाव में और बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी में है।





