नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । पिछले दो दिनों में भारत के पड़ोसी देशों में बड़े भूकंप आए हैं। म्यांमार में भूकंप के झटके के साथ ही शुक्रवार को दिल्ली एनसीआर, मेघालय और मणिपुर समेत भारत के कई हिस्सों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। कल पाकिस्तान और तिब्बत में भी भूकंप के कई झटके महसूस किए गए। पड़ोसी देशों में आई इन आपदाओं ने भारत में भी भूकंप को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
म्यांमार में शुक्रवार, 28 मार्च को 7.2 तीव्रता का भूकंप आया। जिसमें 2,700 से ज़्यादा लोग मारे गए। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जल्द ही भूकंप के झटकों का सामना करेगा। एक रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से संभावित भूकंप के बारे में संकेत दिया गया है, जिसका देश पर ज्यादा असर होगा। भूकंप की चेतावनी रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पूर्वोत्तर भारत में टेक्टोनिक गतिविधि के कारण एक बड़ा भूकंप आ सकता है।
म्यांमार भूकंप
म्यांमार में भूकंप सागाइंग फॉल्ट के साथ क्षैतिज गति के कारण हुआ। जहां भूमि के बड़े हिस्से एक दूसरे के विपरीत दिशाओं में खिसक गए। इस प्रकार की भूकंपीय गतिविधि स्ट्राइक-स्लिप के कारण होती है, जब टेक्टोनिक सीमाओं के साथ तनाव बनता है और अचानक धरती हिलने लगती है। जिसे हम भूकंप कहते हैं। स्ट्राइक-स्लिप फॉल्ट की घटना कैलिफोर्निया में सैन एंड्रियास फॉल्ट जैसे कुछ ऐतिहासिक भूकंपों के समान थी। यह एक उथला, उच्च-तीव्रता वाला भूकंप था, जिससे सतह पर तीव्र कंपन हुआ और भारी क्षति हुई।
भारत में प्रभावित होने वाले राज्य
एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का लगभग 59% हिस्सा भूकंप के जोखिम में है। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों में सबसे ज़्यादा जोखिम है। वहीं, दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे शहर खतरनाक भूकंपीय क्षेत्रों में हैं। चिंता इसलिए भी है क्योंकि इमारतों में भूकंप से बचाव के लिए उचित सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। इससे भूकंप आने पर इमारतों के गिरने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे प्राकृतिक आपदा से ज़्यादा लोगों की मौत हो सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के आपस में टकराने के कारण हिमालयी क्षेत्र में दबाव बनता है। जिसके कारण कभी भी 8 से अधिक तीव्रता वाला ‘ग्रेट हिमालयन भूकंप’ आ सकता है। यह भी बताया गया है कि भारतीय प्लेट सुंडा और बर्मा प्लेटों के नीचे धंस रही है, इससे भयंकर भूकंप और सुनामी आ सकती है। इसके अलावा मध्य और प्रायद्वीपीय भारत में घातक इंट्राप्लेट भूकंप का खतरा है। वहीं, अब इन जोखिमों की चेतावनी ने चिंताएं बढ़ा दी हैं।





