नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। केंद्र की एनडीए सरकार ने लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल (Waqf Amendment Bill) पेश कर दिया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने यह बिल पेश किया, जिसके बाद सदन में बहस शुरू हुई। इस बिल पर चर्चा के लिए 8 घंटे का समय तय किया गया है।
वक्फ संशोधन विधेयक पर लोकसभा में जोरदार बहस
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने किया विरोधलोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश किए जाने पर कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने विरोध जताया। उन्होंने इसे लेजिस्लेचर को “बुलडोज” करने जैसा बताया और संशोधन प्रस्तावों की अनदेखी का मुद्दा उठाया। इस पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि सरकारी और गैर-सरकारी संशोधनों को समान समय दिया गया है
संसदीय प्रक्रिया पर उठे सवाल, स्पीकर ने दिया जवाब
आरएसपी सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाते हुए कहा कि नए प्रावधानों के साथ विधेयक को लाना तकनीकी रूप से सही नहीं है। उन्होंने रूल 81 को सस्पेंड किए बिना चर्चा करने पर आपत्ति जताई। इस पर स्पीकर ओम बिरला ने जवाब दिया कि संसदीय समिति को किसी भी विधेयक में पूर्ण संशोधन करने का अधिकार है। गृह मंत्री अमित शाह ने विधेयक की प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि संसदीय समिति की सिफारिशों को कैबिनेट ने स्वीकार किया और उन्हें विधेयक में शामिल किया गया।
किरेन रिजिजू ने पेश किया वक्फ संशोधन विधेयक
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया। उन्होंने बताया कि इस विधेयक पर अब तक सबसे अधिक याचिकाएं दायर की गई हैं। कुल 284 डेलिगेशन और 25 राज्यों के वक्फ बोर्डों ने अपनी राय दी है। उन्होंने कहा कि बिल में धार्मिक गतिविधियों में हस्तक्षेप का कोई प्रावधान नहीं है। “धार्मिक स्वतंत्रता पर असर नहीं” – रिजिजूरिजिजू ने स्पष्ट किया कि विधेयक का मकसद केवल संपत्ति प्रबंधन से जुड़ा है, न कि धार्मिक मामलों में दखल देना। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी मस्जिद के संचालन में हस्तक्षेप नहीं कर रही है।
“संशोधन नहीं लाते तो संसद भी वक्फ संपत्ति होती” – रिजिजू
विधेयक पर चर्चा के दौरान रिजिजू ने खुलासा किया कि 2013 में दिल्ली वक्फ बोर्ड ने संसद भवन को भी वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया था, जिसे यूपीए सरकार ने डिनोटिफाई किया था। उन्होंने कहा कि अगर मोदी सरकार यह संशोधन नहीं लाती, तो कई और संपत्तियां वक्फ में शामिल हो सकती थीं। इस बयान पर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया।
विधेयक पर विपक्ष का विरोध, सरकार का जवाब
विपक्ष ने विधेयक को असंवैधानिक बताया, जबकि सरकार ने इसे ऐतिहासिक सुधार बताया। रिजिजू ने कहा कि पहले भी 1954 और 1995 में वक्फ कानून में बदलाव किए गए थे, तब इसे असंवैधानिक नहीं कहा गया। उन्होंने विपक्ष पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया। विधेयक पर आगे की प्रक्रियालोकसभा में विधेयक पर चर्चा जारी है। सरकार का दावा है कि यह संशोधन पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ाने के लिए किया गया है। वहीं, विपक्ष इस पर विरोध जारी रखे हुए है।





