नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। संसद में आज 2 अप्रैल वक्फ संशोधन बिल पेश होने से पहले इस पर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। AIMIM दिल्ली के अध्यक्ष शोएब जमई ने इस बिल का विरोध करते हुए कहा कि अगर इसे जबरन मुसलमानों पर थोपा गया तो देशभर में आंदोलन होगा, जिसकी शुरुआत दिल्ली से होगी। उन्होंने कहा कि हम अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करेंगे और संविधान में अल्पसंख्यकों को दिए गए अधिकारों पर हमला बर्दाश्त नहीं करेंगे।
AIMIM का विरोध, दिल्ली से आंदोलन की चेतावनी
AIMIM दिल्ली स्टेट प्रेसिडेंट शोएब जमई ने कहा कि वक्फ संशोधन बिल मुसलमानों के खिलाफ है। अगर इसे जबरन लागू करने की कोशिश की गई तो देशव्यापी आंदोलन होगा और इसकी शुरुआत दिल्ली से होगी। उन्होंने कहा कि पिछली बार जहां आंदोलन खत्म हुआ था, वहीं से इसे दोबारा शुरू किया जाएगा।
बीजेपी सांसद का दावा- गरीब मुसलमानों को होगा फायदा
बीजेपी सांसद संजय जायसवाल ने इस विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह बिल देश और मुसलमानों के हित में है। उन्होंने कहा कि यह संशोधन पारदर्शिता लाने के लिए किया जा रहा है, जिससे गरीब मुसलमानों को भी वक्फ संपत्तियों का लाभ मिलेगा। उनका कहना है कि अब तक वक्फ संपत्तियों का सही उपयोग नहीं किया गया है और यह कानून इसे सही दिशा में ले जाने का प्रयास है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस बिल का विरोध करते हुए कहा कि उनकी पार्टी इसका पूरी तरह से विरोध करेगी। उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह केवल वोट बैंक की राजनीति कर रही है और समाज को विभाजित करने का काम कर रही है। संगरूर से आम आदमी पार्टी के सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर ने कहा कि यह संशोधन मुसलमानों के हक में नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बिल में वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने की बात की गई है, जो अल्पसंख्यकों के अधिकारों के खिलाफ है।
कांग्रेस का विरोध, इमरान मसूद ने उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि यह संशोधन संविधान के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वक्फ संपत्तियों की जांच के नाम पर अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला कर रही है। उन्होंने इसे देश में विवाद और अस्थिरता पैदा करने वाला कदम बताया। कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने इस विधेयक को देश की एकता और अखंडता को तोड़ने वाला बताया। उन्होंने कहा कि सरकार हर मोर्चे पर विफल हो गई है, इसलिए ऐसे बिल लाकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रही है। वक्फ संशोधन बिल पर देशभर में राजनीतिक माहौल गर्म है। जहां बीजेपी इसे पारदर्शिता और गरीब मुसलमानों के हित में बता रही है, वहीं विपक्षी दल इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला करार दे रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि संसद में इस पर क्या फैसला लिया जाता है और आगे इसका क्या असर देखने को मिलता है।




