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‘एसएमए टाइप-1’ पीड़ित वेदिका को मिलेगी नई जिंदगी

महज तीन महिनों मे जुटी 14.3 करोड़ की धनराशि मुंबई, 28 मई (हि.स.)। जेनेटिक बीमारी ‘एसएमए टाइप-1’ से पीड़ित वेदिका सौरभ शिंदे नामक बच्ची के इलाज के लिए 14.3 करोड़ रुपयों की राशि का इंतजाम हो गया है। जिसके चलते महज 11 माह की इस बच्ची के जिन्दा रहने की उम्मीद बंधी है। वेदिका के इलाज के लिए मिलाप संस्था ने बड़ा योगदान कया है। मिलाप के सह-संस्थापक एवं अध्यक्ष अनोज विश्वनाथन ने बताया कि, पुणे की 11 माह की बालिका वेदिका शिंदे ‘एसएमए टाइप-1’ बीमारी से पीड़ित है। यह एक दुर्लभ जेनेटिक बीमारी है। इस बीमारी के कारण दो साल की उम्र से पहले ही बच्चे की जान जाने का खतरा रहता है। डॉक्टरों ने बताया कि जीन रिप्लेसमेंट थेरेपी झोलजेंस्मा से इस बीमारी का इलाज संभव है, जिसकी लागत 16 करोड़ रुपये पड़ती है। इस लागत को देखते हुए वेदिका के माता-पिता ने मिलाप के जरिए अपनी कहानी दुनिया से साझा कर मदद मांगी। विश्वनाथन ने बताया कि, मिलाप प्लैटफॉर्म पर करीब 50 सपोर्ट कैंपेन चलाए गए। सोशल मीडिया पर बरखा सिंह, मास्टर शेफ शिप्रा खन्ना और पैरेंटिंग इनफ्यूएंसर अनुप्रिया कपूर समेत कई हस्तियों ने इसका समर्थन किया। बॉलीवुड अभिनेता जॉन अब्राहम ने भी अपने प्रशंसकों से मदद की अपील की थी। बतौर विश्वनाथन फंडरेजिंग प्लेटफॉर्म मिलाप की पहल पर महज तीन महीनों मे दुनियाभर से 1 लाख, 34 हजार लोगों ने बच्ची के इलाज के लिए 14 करोड़,30 लाख रुपये की राशि दान की है। मिलाप ने पिछले सालभर में विभिन्न मेडिकल इमरजेंसी के लिए 250 करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड जुटाया है। इसके साथ-साथ अधिकारियों ने कर एवं आयात शुल्क में छूट का भी भरोसा दिया है। वेदिका का इलाज कर रहे डॉक्टरों ने अमेरिकी फार्मा कंपनी से दुनिया की इस सबसे महंगी दवा के आयात के लिए बात कर ली है। जरूरत के मुताबिक दवा तैयार करने के लिए वेदिका की जांच चल रही है। उम्मीद है कि दो जुलाई को दवा भारत आ जाएगी। आगामी 7 से 10 जुलाई के बीच वेदिका को इलाज मिल जाएगा। क्या है ‘एसएमए टाइप-1’ बीमारी ? स्पाइनल मस्क्युलर एट्रोफी (एसएमए) एक आनुवांशिक बीमारी है जो नर्वस सिस्टम और स्वैच्छिक मांसपेशी के काम को प्रभावित करती है। यह बीमारी लगभग हर 11 हजार लोगो में से एक बच्चे को हो सकती है, और किसी भी जाति या लिंग को प्रभावित कर सकती है। एसएमए के चार प्रकार हैं – 1, 2, 3 और 4, जिसके लक्षण अलग अलग उम्र में दिखना शुरू होते हैं। लक्षणों की गंभीरता एसएमए के टाइप पर निर्भर करती है। कुछ लोगों में प्रारंभिक लक्षण जन्म से पहले ही शुरू हो जाते हैं, जबकि कुछ में यह लक्षण वयस्क होने तक स्पष्ट नहीं होते हैं। हाथ, पैर और श्वसन तंत्र की मांसपेशियां आम तौर पर पहले प्रभावित होती हैं। इसकी वजह से रोगी में निगलने की समस्या, स्कोलियोसिस इत्यादि उत्पन्न हो सकती हैं। एसएमए वाले व्यक्तियों को सांस लेने और निगलने जैसे कार्यों में कठिनाई होने लगती है। ज्यादातर मरीज रेस्पिरेटरी फेलियर की वजह से समय से पहले मर जाते हैं। हिन्दुस्थान समाचार / सुधांशु जोशी / प्रभात ओझा

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