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स्ट्रीट वेंडर्स के लिए कोविड काल में शुरू की गई पीएम स्वनिधि योजना पर राज्य सरकारों और बैकों के रवैये से चिंतित है संसद की स्थायी समिति

नई दिल्ली, 13 दिसम्बर (आईएएनएस)। कोरोना काल में स्ट्रीट वेंडर्स के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई पीएम स्वनिधि योजना की प्रगति पर चिंता जाहिर करते हुए संसद की स्थायी समिति ने केंद्रीय आवासन और शहरी विकास मंत्रालय और वित्तीय सेवा विभाग के सचिवों और संयुक्त सचिवों की अध्यक्षता में राज्य सरकारों और बैंकों के बीच नियमित आधार पर बैठकें करने की सिफारिश की है ताकि इस योजना का लाभ योग्य लोगों को मिल सके। आवासन और शहरी विकास संबंधी स्थायी समिति ने लोकसभा में पीएम स्वनिधि योजना पर पेश अपनी 10वीं रिपोर्ट में कहा है कि देश के 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस योजना के तहत स्ट्रीट वेंडर्स को मंजूर किए गए लोन की दर 70 प्रतिशत से भी कम रही है। समिति ने लोन को मंजूरी देने, लोन की राशि देने और लोन आवेदन से जुड़े कई नियमों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि केंद्रीय आवासन और शहरी विकास मंत्रालय और वित्तीय सेवा विभाग के सचिवों और संयुक्त सचिवों की अध्यक्षता में राज्य सरकारों और बैंकों के बीच नियमित आधार पर बैठकें होनी चाहिए , प्रत्येक शहरी स्थानीय निकाय में एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति होनी चाहिए । इसके साथ ही संसदीय समिति ने योजना की वैधता के सिर्फ 6 महीने बचे होने के मद्देनजर मामले को उच्चतम राजनीतिक स्तर और कार्यकारी स्तर पर उठाए जाने की सिफारिश भी की है ताकि राज्यों के प्रदर्शन में सुधार लाने और राज्यों एवं संघ शासित प्रदेशों को उनकी मंजूरी और संवितरण दर में सुधार के लिए समय-सीमा बढ़ाई जा सके। आपको बता दें कि कोविड काल में स्ट्रीट वेंडर्स के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई पीएम स्वनिधि योजना के तहत रेहड़-पटरी लगाने वाले लोगों को बिना गारंटी के 10 हजार रुपये तक का कर्ज दिया जाता है, ताकि वो फिर से अपना कारोबार शुरू कर सकें। यह योजना 31 मार्च, 2022 तक के लिए ही है। संसदीय समिति ने सरकार से इस योजना को कम से कम एक वर्ष के लिए और बढ़ाने की भी सिफारिश की है। समिति ने मुंबई में शहरी स्थानीय निकाय द्वारा फेरीवालों और विक्रेताओं को लाइसेंस से वंचित करने पर खासतौर से चिंता जाहिर करते हुए कहा कि पंजीकरण के लिए अधिवास प्रमाण पत्र की अनिवार्यता नहीं होने के बावजूद उनसे इस तरह का सर्टिफिकेट मांगा जा रहा है। समिति ने केंद्रीय आवासन और शहरी विकास मंत्रालय को इस मामले को महाराष्ट्र की राज्य सरकार के साथ उठाने की सिफारिश की है, ताकि इस नियम को बदला जा सके। जगदम्बिका पाल की अध्यक्षता वाली संसद की स्थायी समिति ने निजी बैंकों के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र के कई बैंकों के रवैये पर भी चिंता जाहिर की। निजी बैंकों के रवैये पर चिंता जाहिर करते हुए समिति ने कहा कि 26 अक्टूबर , 2021 तक प्राप्त कुल 47,16,791 ऋण आवेदनों में से निजी क्षेत्र के बैंकों की हिस्सेदारी केवल 2,01,802 यानि केवल 4 प्रतिशत के लगभग की ही है। –आईएएनएस एसटीपी/एएनएम

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