हरिद्वार, 10 अप्रैल (हि.स.)। कुंभ में अनोखे रंग देखने को मिल रहे हैं। यहां कोई लंगर चला रहा है तो कोई चाय बंटवा रहा है। इसी के बीच एक और कारोबार भी इस दौरान सातवें आसमां पर है। वह है चिलम का व्यवसाय। हरिद्वार को कोई ऐसा कोना नहीं है जहां मिट्टी से बनी चिलम न बिक रही हो। इस व्यवसाय से जुड़े अधिकांश व्यापारी नाम न उजागर करने की शर्त पर कहते हैं कि हरिद्वार उनके लिए उर्वरा धरती है। मिट्टी से बने बर्तन और मिट्टी की चिलम हरिद्वार में ही सर्वाधिक बिकती है। वाल्मीकि चौक पर इस व्यवसाय से जुड़े बबलू और प्रियंका का कहना है कि कोरोना से उनके व्यवसाय पर कोई असर नहीं पड़ा है। उनके बंधे हुए ग्राहक हैं। बजाय कोरोना के दौरान मिट्टी के बर्तन सर्वाधिक बिके हैं। चिलम की फैक्टरी हरियाणा के हिसार में हैं। वहीं से वह चिलम मंगवाते हैं। हरिद्वार में उनका यह व्यवसाय वर्षभर चलता है। हिन्दुस्थान समाचार/रजनीकांत/मुकुंद




