प्रतापगढ़, 12 मई (हि.स.)। कोरोना से लड़ाई में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने भी अपना तरीका बदल दिया है। पहले समूह के माध्यम से सिर्फ मास्क की सिलाई करने वाली महिलाएं अब आयुर्वेदिक काढ़ा बनाने का पाउडर तैयार कर रही हैं। बड़ी कंपनियों के उत्पाद से आधे से भी कम कीमत पर मिलने वाले इनके काढ़े के पाउडर की मांग तेजी से हो रही है। महिला स्वयं सहायता समूह बनाने के बाद ही इन महिलाओं ने अश्वगंधा, गिलोय, तुलसी सहित अन्य आयुर्वेदिक औषधियों की खेती शुरू कर दी थी। हालांकि पहले यह महिलाएं खेत में पैदा होने वाली औषधियां सिर्फ प्रदर्शनी में ही ले जाती थी लेकिन अब इनसे काढ़ा बनाने का पाउडर तैयार कर रही है। रानीगंज के सावित्री फुले स्वयं सहायता समूह और श्री गंगा स्वयं सहायता समूह सराय मुल्तानी कि महिलाएं काढ़े के लिए पाउडर तैयार करने में अश्वगंधा, गिलोय, तुलसी, लौंग, हल्दी, काली मिर्च, मुठैली और गुर्च का उपयोग कर रही हैं। समूह के कार्यालय में ही मीरा यादव, रेखा, सुमन, कमलेश व सुषमा सिंह काढ़े के लिए पाउडर पीस कर उसका पैकेट बना रही हैं। इनके पाउडर की कीमत बाजार में उपलब्ध पाउडर से आधे से भी कम है। इनका पाउडर तैयार करने का तरीका देखने के बाद आसपास के लोग ही इसकी खरीदारी कर ले रहे हैं। ग्रामीणों को इनके पाउडर के काढ़े से लाभ भी हो रहा है। महिला स्वयं सहायता समूह के माध्यम से तैयार काढ़े के पाउडर की बिक्री समूह के कार्यालयों के माध्यम से की जाएगी। एनआरएलएम के जिला प्रबंधक रतन कुमार मिश्र ने बताया कि 142 गांव में समूह के कार्यालय बन रहे हैं। 100 गांव में कार्यालय बन चुके हैं। अभी रानीगंज के दो और मानधाता के चार समूह काढ़े का पाउडर तैयार कर रहे हैं। इसकी बिक्री उन्हीं कार्यालयों के माध्यम से की जाएगी। इससे ग्रामीणों को आसानी होगी। हिन्दुस्थान समाचार/दीपेन्द्र/मोहित




