Loksabha Election 2024: 'राम' को जनता देगी मौका? मेरठ में BJP ने सीटिंग सांसद का की जगह अरुण गोविल को उतारा है

मेरठ में सत्ता दल भाजपा के प्रत्याशी अरुण गोविल आईएनडीआईए गठबंधन से सुनीता वर्मा और और बसपा प्रत्याशी देवव्रत त्यागी के बीच मुकाबला माना जा रहा है। हालांकि मेरठ सीट पर कुल आठ प्रत्याशी मैदान में हैं।
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नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर बीजेपी ने यूपी के लगभग 90 प्रतिशत सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नाम का एलान कर दिया है। कुछ सीटों पर नाम बाकी है लेकिन खास बात यह है कि बीजेपी ने मेरठ से अपने सीटिंग सांसद का टिकट काटकर रामायण सीरियल के एक्टर और राम का रोल कर चुके अरुण गोविल को मैदान में उतार दिया है।

कौन किस पार्टी से उतरा है मेरठ की सीट पर

लोकसभा चुनाव के द्वितीय चरण में शुक्रवार को मेरठ लोकसभा संसदीय क्षेत्र में मतदान होगा। अठारहवीं लोकसभा के चुनाव में इस बार मेरठ सीट भी काफी चर्चित है। मेरठ में सत्ता दल भाजपा के प्रत्याशी अरुण गोविल, आईएनडीआईए गठबंधन से सुनीता वर्मा और और बसपा प्रत्याशी देवव्रत त्यागी के बीच मुकाबला माना जा रहा है। हालांकि, मेरठ सीट पर कुल आठ प्रत्याशी मैदान में हैं।

चेहरा बदलकर झोली में सीट गिराने की कोशिश

पीएम मोदी ने अपने चुनावी अभियान की शुरुआत मेरठ से की थी। मेरठ की सीट बीजेपी के लिए काफी अहम है और पिछले चुनाव में यह सीट बीजेपी ने घिसट-घिसट कर बड़ी मुश्किल से जीती थी। इसलिए पार्टी ने राजेंद्र अग्रवाल का टिकट काटकर पॉपुलर चेहरे अरुण गोविल को उतारा है। इतना ही नहीं, गोविल घूम-घूम कर मेरठ की सड़कों पर प्रचार कर रहे हैं।

पिछले चुनाव में देखे मुश्किल हालात

पिछले लोकसभा चुनाव की बात करें तो राजेंद्र अग्रवाल ने मेरठ से महज 4729 वोटों से जीत दर्ज की थी। खास बात यह है कि केवल मेरठ कैंट विधानसभा के वोटों की वजह से ही राजेंद्र अग्रवाल जीत सके थे, वरना वह हार जाते। बसपा प्रत्याशी हाजी मोहम्मद याकूब ने पांच में से चार विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी और कैंट ने भरकर वोट दिया तो राजेंद्र अग्रवाल की जीत तय हो पाई। 2014 में राजेद्र अग्रवाल ने करीब 3 लाख 32 हजार वोटों से जीत दर्ज की थी।

बीजेपी का गढ़ रही है मेरठ लोकसभा सीट

बता दें कि बीजेपी के लिए मेरठ लोकसभा सीट एक गढ़ रही है। यहां एससी के लिए कुछ विधानसभा की सीटें रिजर्व भी हैं। पार्टी 1971 से यहां 5 बार जीत चुकी है। वहीं चार बार कांग्रेस, एक बार बीएलडी, एक बार बसपा सीट अपने नाम कर चुकी है। ऐसे में इस बार इस सीट पर बीजेपी को अपना गढ़ बचाने की चुनौती भी मिल रही है।

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