– तीनों अनी अखाड़ों के श्रीमहंत, सैकडों साधु-संत और प्रशासनिक अधिकारी रहे मौजूद – वैदिक मंत्रों और जय घोष से गूंजा कुम्भ नगरी का कनखल स्थित गंगा तट हरिद्वार, 01 अप्रैल (हि.स.)। हरिद्वार में करीब एक माह तक चलने वाले कुम्भ मेले का गुरुवार को आगाज हो गया। प्रथम दिन गोवर्धन पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ ने विधि विधान से गंगा पूजन कर कुम्भ के सकुशल आयोजन की कामना की। पूजन के दौरान तीनों अनी अखाड़े के श्रीमहंत और सैकड़ों साधु-संतों के साथ भारी संख्या में विद्वान ब्रह्मचारी और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य देवतीर्थ ने कहा कि कोरोना संक्रमण काल में भी उत्तराखंड सरकार और साधु-संतों के प्रयास से कुम्भ का आयोजन होना एक सराहनीय कार्य है। इसके लिए उन्होंने उत्तराखंड सरकार के प्रति धन्यवाद भी ज्ञापित किया। शंकराचार्य ने कहा कि आज पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है। ऐसे में कुम्भ का आयोजन एक बड़ा ही साहसिक कदम है। उन्होंने कहा कि संकट काल में धर्म की कड़ी परीक्षा होती है। इस कठिन समय में भी कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए जप-तप के महानुष्ठान सम्पन्न होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कुम्भ मेले में साधु-संतों द्वारा संपन्न किये जाने वाले यज्ञ एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों से पूरी दुनिया को कोरोना से मुक्ति मिलेगी। जगद्गुरु देवतीर्थ ने कहा कि मां गंगा त्रिपथ गामिनी हैं और कुम्भ की आधार हैं। कुम्भ आयोजन के प्रथम दिन उनकी पूजा से प्राप्त फल अवश्यमेव कल्याणकारी होगा। इससे पहले शंकराचार्य ने निर्वाणी अनी अखाड़े के श्रीमहंत धर्मदास, निर्मोही अनी अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत राजेंद्र दास और दिगम्बर अनी अखाड़े के श्रीमहंत किशन दास तथा सैकड़ों साधु-संतों व महामंडलेश्वरों के साथ कनखल में गंगा मां की विधि विधान से पूजा अर्चना की। विद्वान आचार्यों ने वैदिक मंत्रों के साथ सम्पूर्ण अनुष्ठान संपन्न कराया। वैदिक मंत्रों के बीच श्रद्धालुओं द्वारा किये जा रहे जय घोष से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो रहा था। कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक कुम्भ मेला सुरजीत सिंह पवार और कई अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। सुरक्षा की दृष्टि से पूजन स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। हिन्दुस्थान समाचार/पीएन द्विवेदी




