– अमेरिकी रक्षा मंत्रालय में बतौर वैज्ञानिक हुई डा.मयंक की नियुक्ति – आपात कालीन ओ-1 वीजा पर बुलाया मीरजापुर, 09 अप्रैल (हि.स.)। वैश्विक महामारी का सबब बने कोविड-19 संक्रमणकाल की हैरानी-परेशानी के बीच जनपदवासियों के लिए अच्छी खबर है। नरायनपुर ब्लाक के बगही गांव निवासी डा.मयंक कुमार सिंह की नियुक्ति सात समुंदर पार अमेरिकी रक्षा विभाग में फार्मास्युटिकल साइंटिस्ट के पद पर आपातकालीन नियुक्ति हुई है। डा. मयंक ने बुधवार को पदभार ग्रहण किया। संयुक्त राज्य अमेरिका और दुनिया भर में कोविड-19 महामारी संकट से संबंधित डे्ड्रिरमर तकनीक के क्षेत्र में विश्व में अपनी अनूठी विशेषज्ञता मयंक के पास है। उन्होंने नेशनल डेंड्रिमर एंड नैनो टेक्नोलॉजी सेंटर, नैनो साइंस के जानकार मयंक को संयुक्त राज्य अमेरिका के रक्षा मंत्रालय की ओर से आपात कालीन ओ-1 वीजा जारी किया गया। सात अप्रैल को अमेरिकी मिशिगन राज्य के माउंट प्लेसेंट नगर पहुंचकर अपना कार्यभार ग्रहण किया। डा. मयंक ने न्यूनतम मूल्य के प्रभावी एंटी-वायरल सूक्ष्मऔषधि (नैनो मेडिसिन) विकसित करने वाली टीम के हिस्सा होंगे। नैनो मेडीसिन विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के खिलाफ प्रभावी होगी। 2019 में पुर्तगाल में आयोजित11वीं अंतरराष्ट्रीय डेंड्रीमर (नैनो टेक्नोलॉजी) सेमिनार में डा. मयंक ने अपनी वैज्ञानिक क्षमता व प्रतिभा का बेहतरीन प्रदर्शन किया था। संगोष्ठी में ही डेंड्रीमर विज्ञानिक व डेंड्रीमर्स के जनक डॉ.डोनाल्ड टोमालिया ने उनकी क्षमता को पहचाना और पीएचडी पूरा होते ही वैज्ञानिक के रूप में काम करने का अवसर दिया। उनकी इस उपलब्धि पर पिता श्रवण कुमार सिंह, माता मंजू देवी, चाचा जीवन सिंह, चाची संजू देवी ने हर्ष व्यक्त करते हुए बधाई दी है। यह है मयंक का अहम शोध डा. मयंक ने ब्रेन कैंसर से सम्बंधित अंत:शिरा इंजेक्शन की बजाय एक विशेष प्रकार का टेबलेट विकसित की है जिसे टेबलट के रूप में लिया जा सकता है। इससे कैंसर के मरीज दर्दनाक इंजेक्शन से बच सकता है। इसके अलावा मस्तिष्क व फेफड़े के कैंसर, आयु बढ़ने के लिए विभिन्न बहुक्रियाशील सूक्ष्म उपकरण (नैनो डिवाइसेस), सूक्ष्म औषधि भी विकसित किए हैं। डे्ड्रिरमर-आधारित अवधारणाओं के अनूठा संयोजन दुर्लभ विशेषज्ञता है, जिसे वैश्विक कोविड-19 महामारी संकट के विरूद्ध सफलता पूर्वक लड़ाई के लिए आवश्यक माना जा रहा है। अंतर राष्ट्रीय स्तर पर हो चुके हैं सम्मानित डा.मयंक के भैषजिक वैज्ञानिक परियोजना को भारतीय विज्ञान संस्थान बंगलौर ने भी मान्यता दी है। उन्हें इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस-पोस्ट डाक्टरल फैलोशिप के लिए चयनित किया गया है। हाल ही में इंडियन केमिकल सोसाइटी-कोलकाता, साइंस काउंसिल-लंदन, नेशनल फ़ार्मेसी बोर्ड लंदन जैसी अंतर राष्ट्रीय एजेंसियां भी सम्मानित कर चुकीं हैं। हिन्दुस्थान समाचार/गिरजा शंकर




