back to top
30.1 C
New Delhi
Thursday, March 5, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Lok Sabha Election: यूपी की वो लोकसभा सीटें, जहां इंदिरा गांधी के डर के आगे कई नेता घबराए; जानें क्या है राज?

Uttar Pradesh News: लोकसभा चुनाव का वो दौर जब प्रत्याशी चुनाव लड़ने की जगह चुनाव न लड़ने के लिए घबरा जाते थे। इस सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए सीधा इनकार कर देते थे।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश ने देश को सबसे अधिक प्रधानमंत्रियों की बौछार की है। लेकिन एक ऐसा भी वक्त था जब प्रदेश के सुल्तानपुर और प्रतापगढ़ सहित कुछ ऐसे क्षेत्र थे जहां प्रत्याशी उतरने से घबरा रहे थे। वो दौर ही कुछ ऐसा था क्योंकि 1975 में जब पूरे देश में जब आपातकाल लगा तो सैकड़ों नेता जेल के अंदर बंद हो गए।

आपातकाल का काला दौर

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को आपातकाल का ऐलान कर दिया। देश में 21 मार्च 1977 को आपातकाल रहा इसके बाद लोकसभा चुनाव का बिगुल बजा। इसी समय जेल से छुटकर सैकड़ों नेता बाहर आए। अब सबसे बड़ा सवाल यह था कि इंदिरा गांधी के खिलाफ कैसे खड़ा हुआ जाए? भारतीय जनसंघ, भारतीय लोकदल आदि विपक्षी दलों के नेताओं में बेचैनी बढ़ गई। उसके बाद सभी विपक्षी दलों ने मिलकर ग्रैंड अलायंस बनाई। भारतीय इतिहास में अब तक का ये सबसे बड़ा गठबंधन माना जाता है।

इन सीटों पर आई अड़चन

इस गठबंधन में भारतीय जनसंघ, भारतीय लोकदल, कांग्रेस (ओ) व सोशलिस्ट पार्टी ने मिलकर चुनाव लड़ा। सीट बंटवारे के समय  प्रतापगढ़, सुलतानपुर सहित ऐसे कई लाेकसभा क्षेत्र रहे, जहां से कोई स्थानीय नेता चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं था। इंदिरा गांधी की तानाशाही व जेल में मिली यातना से भयभीत नेताओं को चुनाव जीत पाने का भरोसा ही नहीं था। अवध प्रकाश चौबे ने कहा कि जनता पार्टी बन तो गई थी लेकिन चुनाव आयोग की ओर से पार्टी को कोई चुनाव निशान नहीं मिला। जनता पार्टी ने भारतीय लोकदल (बीएलडी) के निशान पर सभी चुनाव लड़े। इसलिए चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जनता पार्टी की जगह बीएलडी के प्रत्याशियों का नाम दिखता है।

इंदिरा गांधी से छिनी कुर्सी

उस समय जनसंघ से डा.जीतेंद्र अग्रवाल, भालोद के त्रिभुवननाथ संडा यहां के बड़े नेता माने जाते थे। इंदिरा गांधी के खिलाफ रायबरेली से चुनाव लड़ने वाले वाराणसी के प्रखर समाजवादी नेता राज नारायण ने त्रिभुवन नाथ संडा से कहा कि वह चौधरी चरण सिंह से जाकर मिल ले और चुनाव लड़ें, लेकिन संडा नहीं गए। यही स्थिति प्रतापगढ़ में भी रही। तब सुलतानपुर से लड़ने के लिए जुल्फिकार उल्ला उर्फ छोटे मियां व प्रतापगढ़ से रूपनाथ सिंह यादव को प्रत्याशी बनाया गया। दोनों उम्मीदवार चुनाव जीत गए। ग्रैंड अलायंस ने इंदिरा गांधी को धूल चटाई। साल 1977 में जनता दल के सुप्रीम नेता मोरारजी देसाई देश के प्रधानमंत्री बने।

खबरों के लिए क्लिक करें:- www.raftaar.in

Advertisementspot_img

Also Read:

असम चुनाव के लिए कांग्रेस ने 30 सीटों पर तय किए उम्मीदवार, गौरव गोगोई जोरहाट से लड़ सकते हैं चुनाव

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। असम विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) की बैठक...
spot_img

Latest Stories

कुछ देशों में होली पर रंग खेलने पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई, जानिए कौन से हैं वो देश?

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारत में होली सिर्फ एक त्योहार...

Chandra Grahan 2026: साल का पहला चंद्र ग्रहण और होली का संयोग, जानें सूतक में किन कार्यों से रहें दूर

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। फाल्गुन पूर्णिमा पर जहां एक ओर...

Skin Care Tips: ऑयली और डल स्किन से छुटकारा, समर में ऐसे रखें चेहरा फ्रेश और जवान

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। जैसे ही तापमान चढ़ता है, त्वचा...

Iran-Israel War का भारत पर क्या होगा असर, कैसे कच्चे तेल की कीमतों को करेगा प्रभावित?

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अमेरिका और इजरायल ने शनिवार को...