चित्रकूट, 23 मई (हि.स.)। परम पूज्य संत रणछोरदास महाराज के करकमलों से स्थापित श्री सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट स्थापना वर्ष से विभिन्न मौकों पर आपदा एवं महामारी के समय राहत कार्य करता चला आ रहा है। इसी कड़ी में पिछले एक वर्ष से कोरोना के बचाव को शासन से घोषित लाॅकडाउन में चित्रकूट क्षेत्र के आसपास आदिवासी गांवों एवं बस्तियों में 25 हजार से ज्यादा लोगों तक लगातार भोजन के पैकेट उपलब्ध करा रहा है। ट्रस्ट के निदेशक/ट्रस्टी डाॅ बीके जैन ने रविवार को बताया कि मानव सेवा व भूखे को भोजन, वस्त्रहीन को वस्त्र, दृष्टिहीन को दृष्टि देना गुरुदेव ने सच्ची मानव सेवा मानी है। इसी के चलते ट्रस्ट के अन्दर संचालित अन्नपूर्णा रसोई से प्रतिदिन सवेरे छह बजे से भोजन बनाने का कार्य शुरु हो जाता है। 80 टीमें भोजन बनाने का कार्य कर रही हैं। अन्नपूर्णा टीम के साथ सद्गुरु शिक्षा समिति के शिक्षक भी प्रतिदिन 1800 भोजन पैकेट बनाते हैं। स्वच्छता-सफाई एवं गुणवत्तायुक्त भोजन चार-पांच घंटे में तैयार कर पैकेट बनाकर सद्गुरु अन्नपूर्णा वाहनों से गांव-गांव पहुंचाया जाता है। भोजन बनाने व वितरण कार्य में कोरोना गाइडलाइन का पालन किया जाता है। सुदूर गांवों में लोग टकटकी लगाकर भोजन का इंतजार करते हैं। पूज्य गुरुदेव ने अपने जीवनकाल में तमाम अवसरों पर साधु-संत, गरीबों एवं निराश्रितों को भोजन व्यवस्था करते थे। उनका सूत्र वाक्य था दलित नारायण में अपने राम को देखते हैं। अन्नपूर्णा रसोई एवं शिक्षा समिति के कार्यकर्ता गांव-गांव भोजन बांटने का कार्य लगन के साथ कर रहे हैं। प्रतिदिन टीम माइक से एनाउंसमेन्ट कर लोगों को मास्क व दो गज दूरी तथा सैनेटाइजर का प्रयोग करने के प्रति चेताती है। बुखार व सर्दी, खांसी, जुकाम के लक्षण होने पर तुरन्त जांच कराने के प्रति जागरूक कर रही है। हिन्दुस्थान समाचार/रतन




