रजनीश पाण्डेय रायबरेली, 07जून(हि.स.)। कोरोना के बाद कभी स्वाद के मामले में पसंद न आने वाला काढ़ा अब लोगों का पंसदीदा पेय बनाता जा रहा है। कोरोना के कारण मजबूरी में बना आयुवेर्दिक और घरेलू चीजों से तैयार यह बेहतरीन पेय घर—घर में स्थान बना चुका है। घरों में तो यह रोज़ाना के मीनू में शामिल हो ही गया है, चाय की दुकानों में भी इसकी मांग होने से काढ़ा अब वहां भी उपलब्ध है। ग्रामीण अंचलों में तो कई स्थानों में काढ़ा कैफ़े तक खुल गए हैं। हालांकि इनकी संख्या बहुत कम है लेकिन आने वाले समय में यह चाय और रेस्तरांओं के मीनू में प्रमुख स्थान बना ले तो आश्चर्य नहीं है। गावों में खुले काढ़ा कैफ़े कोरोना काल में चर्चा में आया काढ़ा अब कैफ़े में भी उपलब्ध है, रायबरेली के गावों में काढ़ा कैफ़े के खुलने से अब इसका स्वाद घर के बाहर भी मिल सकेगा। रायबरेली के सातवं में लोहड़ा गांव में रविवार को की गई इस अभिनव प्रयोग की शुरूआत हुई और इसका श्रेय जाता है मशहूर व्यंगकार और कवि पंकज प्रसून को। उन्होंने ‘आओ गांव बचाएं मुहिम’ के तहत पहले से चल रहे कोविड केयर सेंटर में इसका शुभारंभ किया। अब यहां लोगों को कुल्हड़ में काढ़ा उपलब्ध कराया जा रहा है।इसके अलावा आसपास की और जिले के अन्य चाय की दुकानों को भी इसके लिए प्रेरित किया जा रहा है। कई दुकानों ने तो इसकी शुरूआत भी कर दी। लालगंज में चाय की दुकान चला रहे रामनरेश का कहना है कि ग्राहक काढ़ा की मांग अब करते हैं और जल्द ही वह अपने दुकान में इसकी व्यवस्था करेंगे। गुरुबख्शगंज के ही चाय दुकानदार जगदीश के अनुसार वह भी अपने दुकान में इसे बनाने की शुरुआत करने वाले हैं। इसी तरह कई चाय स्टॉल चलाने वाले अब इसे भी अपने यहां बनाने की व्यवस्था करने की तैयारी कर रहे हैं। कोरोना के कारण चर्चा में आया ‘काढ़ा’ अब घरों से निकलकर बाज़ार तक पहुंच गया है और जल्दी ही यह ग्राहकों को आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। इमन्युटी को बढ़ाता है ‘काढ़ा’ कोरोना काल मे इमन्युटी बढ़ाने का सबसे कारगर तरीका काढ़ा पीने को माना गया।ज़्यादातर शोध में इस बात की पुष्टि हुई है कि काढ़ा कोरोना के खिलाफ़ एक अचूक अस्त्र है।कोरोना काल के दौरान तुलसी के पत्ते,लौंग,अदरख, दालचीनी, कालीमिर्च आदि से तैयार काढ़ा लोगों ने खूब उपयोग किया और अब काफ़ी लोगों ने इसे दिनचर्या में शामिल कर लिया है। आयुर्वेद के जानकारों के अनुसार रोज़ाना दो बार काढ़ा का सेवन करने से छाती में मौजूद बलगम भी खत्म हो जाता है और सांस न ले पाने की समस्या भी खत्म हो जाती है।हालांकि इसके लिए विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक गर्म और ज़्यादा काढ़ा पीने से परहेज़ करना चाहिए। हिन्दुस्थान समाचार/




