जयपुर, 28 जून (हि.स.)। बारिश का मौसम आमजन के साथ-साथ रेल संचालन के लिए भी चुनौतीपूर्ण होता है। कई स्थानों पर अत्याधिक बारिश होने से रेल पटरियों के नीचे कटाव हो जाता है तथा रेल संचालन बाधित होता है, ऐसी स्थितियों को ध्यान में रखकर रेलवे द्वारा बारिश के मौसम में विशेष प्रबंध किए जा रहे है। उत्तर पश्चिम रेलवे के उप महाप्रबन्धक (सामान्य) व मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी लेफ्टिनेंट शशि किरण के अनुसार उत्तर पश्चिम रेलवे में जून में चारों मण्डलों को अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाने के निर्देश प्रदान किए गए है। जिन रेलखण्डों पर पूर्व वर्षों के अनुमान के आधार पर अत्यधिक बारिश की संभावना होती है अथवा मौसम विभाग द्वारा कोई आंधी, तेज हवा या भारी वर्षा की चेतावनी जारी की जाती है तो ऐसे स्थानों पर सघन निगरानी के लिए निर्देश जारी किए गए है। मौसम संबंधी सूचना या चेतावनी प्राप्त होने पर तुरंत प्रभाव से रेलवे ट्रेक की निगरानी करने और सतर्क रहने के लिये गैंगमेन को निर्देशित किया गया है। पेट्रोलमैन द्वारा रेलवे लाइन, पुलों इत्यादि पर सघन पैट्रोलिंग करने के लिए निर्देशित किया गया है तथा उनके लिए गश्त चार्ट व गश्त पुस्तकें बनाई गई है। किसी भी कठिन परिस्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त ट्रेक अनुरक्षण की सामग्री उपलब्ध करवाई गई है। बारिश की अधिकता वाले स्थानों पर कटाव की स्थिति से निपटने के लिये मिट्टी से भरे कट्टे, रोड़ी इत्यादि की पर्याप्त व्यवस्था की जाती है, ताकि टे्रक के नीचे मिट्टी का कटाव होने पर तुरंत ठीक कर रेल संचालन को सुचारू किया जा सके। इसके साथ ही पहाड़ी क्षेत्रों में पत्थर खिसकने की संभावना रहती है। वहां अतिरिक्त इंतजाम किए जा रहे है तथा जेसीबी व ट्रेक्टर इत्यादि की व्यवस्था की जा रही है जिससे किसी भी परिस्थिति में ट्रेक को तुरंत क्लीयर किया जा सके। इंजीनियरिंग विभाग के कर्मचारी नियमित शिड्यूल अनुसार ट्रेक का निरीक्षण करेंगे और सभी स्थितियों का जायजा लेंगे। इसके साथ ही रेलवे द्वारा राज्य स्तरीय समिति राजस्थान के साथ समन्वय कर स्थिति के अनुसार कार्य किया जा रहा है। रेलवे द्वारा रोड अण्डर ब्रिज, सीमित ऊंचाई के पुलों पर समीप की दीवार की ऊंचाई बढ़ाना, पानी निकास की व्यवस्था बेहतर बनाना, मोटर व पम्पों की व्यवस्था प्रमुखतया की गई है। इसके अतिरिक्त रेलवे सम्बंधी अनुरक्षण कार्य के साथ पानी भरने वाले स्थानों पर गेज मार्किंग करना, पुलों के नीचे पानी निकास के स्थानों का अनुरक्षण व नियमित निरीक्षण, ट्रेक के आस-पास लगे वृक्षों की कटाई व छंटाई जैसे महत्वपूर्ण कार्य कर दिए गए है। रेलवे द्वारा 600 रोड अण्डर ब्रिज व सीमित ऊंचाई के पुलों की पहचान कर रेन हार्वेस्टिग सिस्टम स्थापित किये गये है। हिन्दुस्थान समाचार/रोहित/ ईश्वर




