नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । राजस्थान में अब पंचायत और शहरी निकायों के चुनाव एक साथ कराए जाएंगे। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को छह महीने के भीतर चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद सरकार ने “वन स्टेट वन इलेक्शन” की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने परिसीमन प्रक्रिया के तहत शहरी क्षेत्रों के लिए शहरी विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पंचायत राज मंत्री मदन दिलावर की अध्यक्षता में बनी समितियों की रिपोर्ट को मंजूरी दे दी है।
इससे पहले राज्य निर्वाचन आयुक्त मधुकर गुप्ता ने नई मतदाता सूचियों के प्रकाशन की तैयारी के आदेश दिए थे। हालांकि राज्य सरकार पहले ही “वन स्टेट वन इलेक्शन” की घोषणा कर चुकी थी, लेकिन कई पंचायतों और शहरी निकायों में छह महीने बीतने के बावजूद चुनाव नहीं हो सके थे।
सरपंच-प्रधानों के चुनाव में देरी
दरअसल, राजस्थान में सरपंच और प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद पंचायतों की जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारियों को सौंप दी गई है। वहीं, नगर निगम और नगर पालिकाओं में भी समय पर चुनाव नहीं होने के कारण यही स्थिति बनी हुई है। इस देरी को लेकर कई नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। उनका कहना था कि कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद चुनाव न कराना संविधान का उल्लंघन है।
पंचायत चुनाव छह महीने के भीतर कराने के निर्देश
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी पंचायत चुनाव छह महीने के भीतर कराए जाएं। हालांकि, राज्य की कई पंचायतों का कार्यकाल 2027 तक है, और “वन स्टेट वन इलेक्शन” की घोषणा अब तक पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है। सरकार ने सिंगल बेंच के इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट की डबल बेंच में अपील दायर की है। सरकार का कहना है कि उसे यह संवैधानिक अधिकार है कि वह राज्य में “वन स्टेट वन इलेक्शन” लागू कर सके। अब चुनाव प्रक्रिया, परिसीमन और हाईकोर्ट के फैसले के बीच राज्य की राजनीतिक दिशा तय होगी। जनता का दबाव और न्यायालय का आदेश, दोनों ही सरकार के लिए निर्णायक मोड़ बन सकते हैं।





