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Wednesday, March 4, 2026
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Rajasthan चुनाव नतीजों पर सबका ध्यान, चुनावी ड्यूटी से शिक्षक परेशान; छात्रों के भविष्य के लिए की ये खास मांग

RJ Election Effects:राजस्थान विधानसभा चुनाव में शिक्षकों की ड्यूटी लगाने से स्कूली विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हुई है। कई शिक्षक संघों ने आवाज उठाई और खुद को चुनावी ड्यूटी से मुक्त करने की मांग की।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। राजस्थान विधानसभा चुनाव में शिक्षकों की ड्यूटी लगाने से स्कूली विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हुई है। इसके विरोध में कई शिक्षक संघों ने आवाज उठाई और खुद को चुनावी ड्यूटी से मुक्त करने की मांग की। चुनावी ड्यूटी की वजह से शिक्षकों के स्कूल नहीं आने से छात्र-छात्राओं का पाठ्यक्रम अधूरा रह गया है। एक लाख से ज्यादा शिक्षकों की ड्यूटी विधानसभा चुनाव में लगाए जाने से छात्रों की पढ़ाई बाधित हुई है। छात्रों को अब भी शिक्षकों के स्कूल आने का इंतजार है, लेकिन यह इंतजार चुनाव परिणाम आने के बाद खत्म होगा।

अर्द्धवार्षिक और बोर्ड परीक्षाएं नजदीक

स्कूलों में 11 दिसंबर से अर्द्धवार्षिक परीक्षा है। चुनाव परिणाम आने के बाद जब शिक्षक स्कूलों में लौटेंगे, तब अर्द्धवार्षिक परीक्षा तक का कोर्स पूरा कराने और छात्रों की समस्याओं का समाधान कराने के लिए सिर्फ एक सप्ताह बचेगा। शिक्षक संघ शेखावत के प्रदेश अध्यक्ष महावीर सिहाग ने कहा कि चुनाव को लेकर मतदान हुए हैं। ये महत्वपूर्ण कार्यक्रम है, लेकिन शिक्षण कार्य भी महत्वपूर्ण है। अभी विधानसभा चुनाव में शिक्षकों की ड्यूटी लगी है, जबकि अर्द्धवार्षिक परीक्षा और इसके बाद बोर्ड की परीक्षा नजदीक है। ऐसे में शिक्षकों की लंबे समय तक चुनावी ड्यूटी लगने से शिक्षण कार्य पर विपरीत प्रभाव पड़ा है।

शिक्षकों को चुनावी ड्यूटी से तत्काल मुक्त करें

प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षक संघ के अंजनी कुमार का कहना है कि सिलेबस पूरा नहीं हुआ है। शिक्षकों की ड्यूटी बीएलओ और चुनावी कार्य में लगने से छात्र शिक्षा से महरूम रहे हैं। ऐसे में शासन-प्रशासन को भविष्य में इस बात पर ध्यान रखना चाहिए कि शिक्षकों की ड्यूटी गैर शैक्षणिक कार्य में न लगाई जाए। वर्तमान में जिन शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी लगी है, उन्हें तत्काल इस काम से मुक्त करें। ताकि छात्रों को अर्द्धवार्षिक परीक्षा की तैयारी कराई जा सके। प्रतिबंधित जिला शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश मिर्धा ने सरकार से ये मांग की है कि शिक्षकों की ड्यूटी गैर शैक्षणिक कार्यों में ना लगाते हुए उन्हें शिक्षण काम के लिए स्वतंत्र किया जाए, ताकि राजस्थान में शैक्षणिक वातावरण बन सके।

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