नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । पंजाब कांग्रेस में जारी अंदरूनी कलह एक बार फिर सुर्खियों में है। इसी कड़ी में पार्टी के लगभग 35 नेताओं ने केंद्रीय नेतृत्व को पत्र भेजकर मुलाकात के लिए समय मांगा है। बताया जा रहा है कि ये सभी नेता पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के करीबी माने जाते हैं। नेताओं का कहना है कि वे पंजाब में पार्टी की मौजूदा स्थिति और जमीनी हकीकत से केंद्रीय नेतृत्व को अवगत कराना चाहते हैं। इस चिट्ठी के सामने आने के बाद प्रदेश कांग्रेस की सियासत में हलचल और तेज हो गई है।
चिट्ठी सार्वजनिक नहीं की गई
हालांकि नेताओं द्वारा भेजी गई यह चिट्ठी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन पूर्व विधायक कुशलदीप सिंह ‘किक्की’ ढिल्लों ने इसके हस्ताक्षरों को लेकर अहम जानकारी दी है। उनके मुताबिक, पत्र पर कांग्रेस के कई पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री साइन कर चुके हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी इस चिट्ठी पर हस्ताक्षर करने वालों में शामिल नहीं हैं।
‘पार्टी के भीतर संवाद स्थापित करना समय की मांग’
जानकारी के अनुसार, यह पत्र लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल को भेजा गया है। नेताओं का कहना है कि इसका मकसद किसी के समर्थन या विरोध में खड़ा होना नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर संवाद स्थापित करने के लिए समय की मांग करना है।
चरणजीत सिंह चन्नी के बयान से सियासी बवाल
पंजाब कांग्रेस में चल रही उठापटक के बीच पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का एक वीडियो सामने आने से पार्टी की अंदरूनी असहमति खुलकर उजागर हो गई है। इस वीडियो में चन्नी ने दलित समुदाय को पार्टी में पर्याप्त प्रतिनिधित्व न मिलने का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि पंजाब की कुल आबादी में दलितों की हिस्सेदारी करीब 35 से 38 प्रतिशत है, लेकिन इसके अनुरूप उन्हें नेतृत्व के अहम पदों पर स्थान नहीं मिल पा रहा है।
चुनावी रणनीति के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है एकजुटता
चरणजीत सिंह चन्नी ने यह भी कहा कि उनकी टिप्पणी किसी समुदाय या वर्ग के खिलाफ नहीं थी और उन्हें जानबूझकर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। इसी घटनाक्रम के बीच भाजपा नेता कुलजीत सिंह ढिल्लों द्वारा चन्नी को भाजपा में शामिल होने का खुला निमंत्रण दिए जाने से सियासी माहौल और गरमा गया है। गौरतलब है कि पंजाब में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में कांग्रेस के भीतर यह उथल-पुथल न सिर्फ संगठन की एकजुटता, बल्कि आगामी चुनावी रणनीति के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।





