नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। पुणे पॉर्शे केस में पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बड़ा एक्शन लिया है। पुलिस ने ससुन अस्पताल के फॉरेंसिंक विभाग के HOD समेत दो डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। इन पर नाबालिग आरोपी के ब्लड सैम्पल बदलने का आरोप है। बता दें कि नाबालिग के ब्लड रिपोर्ट में शराब की पुष्टि नहीं हुई थी, जबकि सीसीटीवी फुटेज में सामने आया था कि घटना से पहले नाबालिग ने पब में शराब पी थी। अब जानकारी सामने आई है कि नाबालिग के परिवारवालों ने अपनी पहुंच का इस्तेमाल करके अस्पताल से उसके ब्लड सैम्पल ही गायब करवा दिए थे।
कैसे सामने आई बात
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 19 मई की सुबह 11 बजे नाबालिग आरोपी का ब्लड टेस्ट किया गया। ये देखने के लिए कि उसके खून में शराब की मात्रा है या नहीं। रिपोर्ट में आरोपी के ब्लड में शराब के होने की पुष्टि नहीं हुई थी। इससे पुलिस का शक गहराया। पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू की और पता चला कि 19 मई को अस्पताल के डॉक्टरों ने नाबालिग का ब्लड एक ऐसे व्यक्ति के ब्लड से रिप्लेस कर दिया था जिसने शराब नहीं पी थी। ब्लड सैम्पल से छेड़छाड़ और सबूत मिटाने के आरोप में पुलिस ने दो डॉक्टरों को गिरफ्तार कर लिया था।
क्या है पुणे पॉर्शे केस?
18 मई की देर रात पुणे में एक तेज़ रफ्तार पॉर्शे कार ने दो बाइक सवार इंजीनियरों को कुचल दिया था। दोनों इंजीनियरों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी। ये महंगी गाड़ी एक नाबालिग चला रहा था। जो कि पुणे के एक अमीर बिल्डर परिवार से ताल्लुक रखता है। घटना के बाद 17 साल का ये आरोपी पकड़ा गया, हालांकि शुरुआत में जुविनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) ने उसे 15 घंटे के अंदर ही जमानत दे दी। जमानत की शर्त थी सामाजिक कार्य और रोड सेफ्टी पर निबंध। मामला बढ़ा तो JJB ने नाबालिग की जमानत खारिज कर दी और उसे 15 दिन के लिए रिमांड होम में रखने का आदेश दे दिया।
मामला सामने आने के बाद से ही नाबालिग का परिवार उसे बचाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहा है। पहले नाबालिग के दादा ने ड्राइवर पर पूरा आरोप अपने सिर ले लेने का दबाव बनाया था और अब परिवार ने ब्लड सैम्पल तक बदलवा डाले। इस एक्सीडेंट मामले में नाबालिग के पिता और दादा दोनों को ही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
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