नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । महाराष्ट्र की सियासत एक वायरल वीडियो के चलते गर्मा गई है, जिसमें उपमुख्यमंत्री अजित पवार सोलापुर (ग्रामीण) की डिप्टी एसपी अंजना कृष्णा को फटकार लगाते सुनाई दे रहे हैं। यह मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। जो बात पहले केवल एक प्रशासनिक नोकझोंक मानी जा रही थी, वह अब सीधे महिला अधिकारी की साख पर सवाल उठाने तक पहुंच गई है। अजित पवार के एक समर्थक विधायक ने UPSC को पत्र लिखकर अंजना कृष्णा की नियुक्ति पर आपत्ति जताई है।
विवाद में आया नया मोड़
अजित पवार और अंजना कृष्णा के बीच हुए विवाद ने तब और तूल पकड़ लिया, जब एनसीपी (अजित पवार गुट) के एमएलसी अमोल मिटकरी ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को एक औपचारिक पत्र भेजा। अपने पत्र में मिटकरी ने अंजना कृष्णा की शैक्षणिक योग्यता, जाति प्रमाणपत्र और अन्य चयन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग की है। इस कदम को लेकर विवाद और गहरा गया है। वहीं, आलोचकों का कहना है कि यह पत्र एक महिला अधिकारी को राजनीतिक दबाव में लाने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की कोशिश है, जो सिर्फ अपने दायित्वों का पालन कर रही थीं।
अंजना कृष्णा के समर्थन में आयी सामाजिक कार्यकर्ता
अंजना कृष्णा के समर्थन में अब सामाजिक कार्यकर्ता अंजली दमानिया भी खुलकर सामने आ गई हैं। उन्होंने इस पूरे विवाद को लेकर राज्य सरकार और राजनीतिक नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। दमानिया ने सवाल उठाया कि “क्या यही ‘चाचा’ का राज है? एक ईमानदार अधिकारी के साथ इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। यह कैसी बेतुकी हरकत है?” उन्होंने आरोप लगाया कि अंजना कृष्णा के खिलाफ की जा रही कार्रवाई की असली वजह उनका अवैध रेत खनन और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों पर की गई कार्रवाई है।
दमानिया ने चेतावनी दी कि अगर अधिकारी को डराने-धमकाने की कोशिशें जारी रहीं, तो वे इस मामले को न्यायालय तक ले जाने से भी पीछे नहीं हटेंगी। उन्होंने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि “जो नेता आज सत्ता में हैं, वे उस अधिकारी के जूते के काबिल भी नहीं हैं, फिर भी उन्हें दबाने की कोशिश कर रहे हैं।”
विपक्ष का तीखा हमला
अंजना कृष्णा के खिलाफ उठाए गए सवालों ने राज्य की राजनीति में नया भूचाल ला दिया है। इस पूरे विवाद को लेकर अब विपक्षी दल भी आक्रामक मुद्रा में आ गए हैं। कांग्रेस नेता यशोमती ठाकुर ने अमोल मिटकरी द्वारा UPSC को भेजे गए पत्र की कड़ी आलोचना करते हुए इसे “बड़ी शर्मनाक” हरकत बताया। यशोमती ठाकुर ने कहा कि “जो नेता शिवाजी, शाहू, फुले और अंबेडकर के विचारों की दुहाई देते हैं, उनके लिए इस तरह की हरकत शोभा नहीं देती।” उन्होंने सोशल मीडिया पर यह भी सवाल उठाया कि “अचानक अंजना कृष्णा की जाति और शैक्षणिक दस्तावेजों पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं? क्या यह किसी दबाव या साजिश का हिस्सा है?”
अजित पवार ने विवाद पर दी सफाई
अंजना कृष्णा के साथ हुई विवादित घटना के बढ़ते राजनीतिक विवाद के बीच अजित पवार ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य कानून प्रवर्तन में हस्तक्षेप करना नहीं था, बल्कि स्थिति को तनावमुक्त बनाना था। पवार ने शुक्रवार को बयान जारी करते हुए कहा, “मैं यह कहना चाहता हूं कि मेरा इरादा किसी भी तरह से पुलिस के कामकाज में हस्तक्षेप करना नहीं था। मेरा मकसद था कि जमीनी स्तर पर स्थिति शांत रहे और विवाद बढ़ने से रोका जा सके।” उन्होंने पुलिस बल और उसके अधिकारियों, खासकर महिला अधिकारियों के प्रति अपनी पूरी श्रद्धा व्यक्त की और कहा कि वे कानून के शासन को पूरी तरह से महत्व देते हैं।
अजित पवार ने यह भी कहा कि वह अवैध गतिविधियों जैसे अवैध रेत खनन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। इस बीच, क्षेत्रीय समाचार चैनलों पर एक वीडियो क्लिप भी प्रसारित हुई, जिसमें अजित पवार को करमाला की उपविभागीय पुलिस अधिकारी अंजना कृष्णा से राकांपा कार्यकर्ता के फोन पर बातचीत करते देखा गया। वीडियो में कृष्णा शुरुआत में अजित पवार की आवाज नहीं पहचान पाईं, जिसके बाद अजित पवार ने कथित तौर पर कार्रवाई रोकने के लिए उन्हें वीडियो कॉल किया था।




