सीहोर, 10 मार्च (हि.स.)। जिले में इस समय धर्म की गंगा बह रही है। प्राचीन और आस्था के केन्द्र सभी श्री शिव मंदिरों में इस समय विशेष पूजा-अर्चना का दौर जारी है। इस जिले में इतने अधिक अति प्राचीन आस्था के केन्द्र हैं, जहां आराधना और दर्शन करने के लिए दूर-दूर से भगवान शिव शंकर के भक्त आते हैं। पौराणिक नगरी सिद्धपुरी के शिव मंदिरों की ख्याति देशभर में रही है। पार्वती नदी का संबंध भी शिव महिमा से जुड़ा हुआ है। शिवना के किनारे 108 शिव मंदिरों का जिक्र होता रहा है। ऐसे में महाशिवरात्रि को शिव मंदिरों पर आज भी शिव भक्तों की भीड़ उमड़ती है। यह प्रस्तुत है प्रमुख शिव मंदिरों के बारे में जानकारी। राजधानी भोपाल के नजदीकी जिला मुख्यालय सीहोर का प्राचीन नाम सिद्धपुर है। यही सुखद प्रतिफल है कि यहां आस्था और विश्वास के धार्मिक स्थानों की संख्या काफी अधिक है, जहां महाशिवरात्रि पर विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। एक शिवलिंग में एक हजार शहर के बडियाखेड़ी में सबसे पुराना शिवालय स्थित है, जिसे सहस्त्रलिंगम के नाम से जाना जाता है। बताया गया है कि यहां एक शिवलिंग में एक हजार शिवलिंग समाहित हैं। इतिहासकार बताते हैं कि इस प्रकार के शिवलिंग पूरे देश में मात्र तीन ही हैं। उन्होंने बताया कि शहर में यह सबसे पुराना शिवालय है। इस मंदिर की ख्याति पूरे देश में है और देशभर के श्रद्धालु यहां आते रहे हैं। पेश्वाकालीन मंदिर शहर में बाल बिहार मैदान मार्ग पर स्थित है मनकामेश्वर मंदिर, इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां जो भी मन्नत मांगी जाती है, वह पूरी होती है। यही सुखद संयोग है कि शहर के अधिकांश लोग महाशिवरात्रि के दिन की शुरुआत इस मंदिर में भगवान के दर्शन कर और पूजा-अर्चना से करते हैं। जानकारी के अनुसार मनकामेश्वर महादेव मंदिर पेश्वाकालीन है। जब सीहोर मराठों के अधिपत्य में रहा है, तब इस मंदिर का निर्माण कराया गया। इस मंदिर की विशेषता है कि यहां बड़ी बावड़ी भी है, जो हमेशा जीवित रहती है। इसके बनाने का उद्देश्य संभव यही रहा होगा कि प्रतिदिन बावड़ी के पानी से भगवान शिवजी का अभिषेक किया जाए। यह मंदिर मराठा कालीन है, इसलिए इसके शिल्प पर उसकी छाप नजर आती है। मनकामेश्वर मंदिर के पुजारी ने बताया कि महाशिवरात्रि पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। मंदिर का त्रिकोण पावन सिद्धपुर नगरी की पहचान प्राचीन काल से ही देशभर में रही है। बताते हैं कि पेश्वाकाल में सीहोर को अनेक उपलब्धियां मिली हैं। इतिहासकार ने बताया कि श्री गणेश मंदिर, कस्बा स्थित श्री हनुमान जी का मंदिर और मनकामेश्वर मंदिर यह तीनों मंदिर भौगोलिक स्थिति में वास्तु के हिसाब से त्रिकोण में बने हुए हैं। जो किसी अच्छी सोच के साथ बनाए गए होंगे। इन सभी मंदिरों की ख्याति पूरे देश में हैं और यहां विशेष पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालु दूर दूर से आते हैं। बताया गया है कि दो मर्तबा ऐसा हुआ है, जब सीहोर पेश्वाओं के आधिपत्य में रहा है। उस समय से ही लोग बताते रहे हैं कि पेश्वाओं का ज्ञान काफी था और वह अधिकांश कार्य वास्तु के हिसाब से ही करते थे, उस काल के सभी मंदिरों में वास्तु की छाप नजर आती है। पानी टपकने का चमत्कार जिले में अति प्राचीन टपकेश्वर मंदिर। यह मंदिर पहाड़ों के बीच में है, इसलिए जब श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं तो उनका मन प्राकृतिक सुंदरता से अपने आप ही आनंदित हो जाता है। यहां भगवान के ऊपर लगातार पानी टपकना किसी चमत्कार से कम नहीं है। महाशिवरात्रि के दिन लोग यहां आते हैं, इस मंदिर की पहचान पूरे देश में है। इन दिनों भी यहां बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना जारी है। कई लोगों ने पानी टपकने के चमत्कार के बारे में जानना चाह लेकिन कोई भी उस रहस्य को नहीं जान सका है। हिन्दुस्थान समाचार / महेन्द्र




