नर्मदापुरम, एजेंसी। नर्मदापुरम के ऐतिहासिक संत शिरोमणि रामजीबाबा का मेला दो दिन पहले ही समाप्त कर दिया। यह मेला 18 फरवरी को समाप्त होना था, लेकिन इसे 16 फरवरी को समापित कर एक मशहूर फिल्म की यह पंक्तियों को साबित कर दिया कि जब मॉझी नाव डुबोये तो उसे कौन बचाये।
मेले में आने वाली भीड़ के लिए खड़ी हुई परेशानी
मुख्य नगरपालिका और जिला प्रशासन की इस मनमानी ने मेले में आने वाली भीड़ के लिए परेशानी खड़ी कर कई सवाल इस मेले के कपाल पर लिख दिये है, जिनका जबाव इस नगर ही नहीं अपितु मेले में बाहर से व्यापार करने वाले आने वाले झूले ,मौत का कुआ, नटवरलाल गधा सहित सभी चाहते है।
18 फरवरी को खत्म होने वाला मेला 16 फरवरी किया समाप्त
अमरप्रेम फिल्म की ये दो पंक्तियॉ -मझधार में नैया डोले तो मॉझी पार लगाये, मॉझी जो नाब डुबोये , उसे कौन बचाये, संतशिरोमणि रामजीबाबा मेले के 18 फरवरी के दो दिन पूर्व 16 फरवरी को समापन में जो मेला और मेले में बाहर से व्यापार करने आये सभी के जेहन को झकझोर रहा है कि इस मेले के साथ उन्हें डुबोने वालों में स्वयं मांझी के रूप में उभरे कलेक्टर ने उन्हें बचाने की बजाय डुबो दिया, तब वे कैसे अपने आप को इस भारी नुकसान से सम्भाल पायेंगे?
विधायक व्यस्त होने की वजह से नहीं आ पाए
मेले को दो दिन पूर्व समापित करने के आयोजन में यह आश्चर्यजनक तथ्य रहा कि कलेक्टर स्वयं मुख्य अतिथि थे, विधायक व्यस्त होने से नहीं आये, जो आये वे तैराकी संघ के अध्यक्ष थे, जिन्हें चाहिए था कि मेले की नैया दो दिन पूर्व डूब रही है, यानि मझधार में डोल रही है तो उन्हें पार लगाना चाहिए, जिसके लिये मेले के सभी व्यापारी उनसे निवेदन कर अपनी यह बात बता चुके थे, पर वे मेले को डुबोने के पक्ष में पूरे मनोयोग,मनोबल से थे, बाकि जो थे वे सभी कलेक्टर के मातहम निरीह थे, जो उनके सामने जुबान खोलने की हिम्मत नहीं रखते, इसलिये ये सभी 2 दिन पूर्व ही मेले की बर्बादी के तमाशे के साक्षी बने।
महाशिवरात्रि पर्व के दो दिन पूर्व किया गया मेला समाप्त
हर किसी के दिमाग में यह सवाल झकझोर रहा है कि महाशिवरात्रि पर्व के दो दिन पूर्व नर्मदापुरम के मेले की हजारों लोगों की रौनक को बेरोनक कर मेले की बिजली आपूर्ति ठप्प करने के तुगलकी निर्णय के क्या मायने लगाये, जबकि मेले की नैया को डोलने पर मॉझी पार लगाये कि युक्ति की कसौटी पर नगरपालिका कोई गलती करती, या इस तरह का निर्णय लेती तब जिला प्रशासन उसके कान उमेटकर उसे लाईन पर ला देता, पर निर्णय तो जिला प्रशासन के मुखिया कलेक्टर का है, जिसपर विधायक स्वयं सक्षम है कि वे इस बगावती तेवर को धरातल पर आने ही नहीं देते पर वे भी प्रशासन की गलती कहे या कमजोरी में शामिल होकर दो दिन पूर्व ही मॉझी का भरोसा तोड़ने में अपनी नैतिक जिम्मेदारी का निर्वहन न करनेवालों में शामिल हो गये, और कलेक्टर रामजीबाबा मेले को समय से दो दिन पूर्व ही बंद कर पचमढ़ी मेले की कमान संभालने जा पहुंचे।




