गुना, 7 जून (हि.स.) । निजी स्कूलों में नि: शुल्क शिक्षा को लेकर अनाथ बच्चों के लिए भी रास्ते खुल गए हैं। जिन बच्चों के अभिभावकों की कोविड की वजह से मौत हो चुकी है, उन्हें इस अधिनियम के तहत बिना लॉटरी सिस्टम के दायरे में लाए बिना ही प्रवेश मिलेगा। ऐसे बच्चों की जानकारी भी महिला एवं बाल विकास विभाग ने मांगी गई है, ताकि उनसे व्यक्तिगत संपर्क किया जा सके। सत्र 2021-22 के लिए जिले भर के 630 स्कूलों में 6700 बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा। हालांकि ऑनलाइन आवेदन की अभी तिथि घोषित नहीं की गई है। इस माह के अंत तक प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। प्रवेश को लेकर रिजर्व सीटों से जुड़ी समस्याओं को भी सुलझा दिया गया है। प्रवेश से पहले पड़ोस की सीमा के 6 विवाद सुलझे नि:शुल्क प्रवेश को लेकर स्कूल की संख्या, उनकी जानकारी एवं अन्य समस्याओं को दूर करने के लिए समय दिया था। इस दौरान 6 पड़ोस की सीमा का विवाद सामने आया। स्कूल दूसरे वार्ड या गांव में था, लेकिन दस्तावेज में यह दूसरी जगह दर्ज था। इस तरह की समस्या को दूर किया गया। इसी तरह 42 स्कूलों ने रिजर्व सीट से जुड़ी अपनी समस्या रखी। ज्यादातर ने आवेदन में कहा कि दर्ज बच्चों की संख्या के हिसाब से उनके यहां 25 फीसदी निशुल्क प्रवेश दिया जाना है लेकिन कई जगह विभाग ने कम संख्या लिख दी है। इससे भी ठीक कर संख्या बढ़ाई गई। वहीं कुछ संख्या रिजर्व सीट की संख्या कम की गई। डिप्टी कलेक्टर एवं जिला परियोजना समन्वयक सोनम जैन से इन सभी विसंगतियों को दूर किया। पहले अनाथ बच्चों को मिलेगा प्रवेश नि:शुल्क शिक्षा अधिनियम के दायरे में अनाथ बच्चे (जिनके कोरोना संक्रमण की वजह से माता-पिता या अभिभावक का निधन हो गया है) को भी प्रवेश दिया जाएगा। इस अधिनियम के तहत 3 से 7 साल तक के बच्चे शामिल हो सकते हैं। उनका भी अन्य बच्चों की तरह ऑनलाइन आवेदन लिया जाएगा। ऐसे बच्चे को प्रवेश के समय लॉटरी सिस्टम से बाहर रखा जाएगा। पहले इन्हें प्रवेश दिया जाएगा, फिर बची सीट पर लॉटरी सिस्टम लागू होगा। 52 संकुल केंद्रों पर किया जाएगा सत्यापन प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे, इसकी तिथि बाद में घोषित होगी। इन दस्तावेज का सत्यापन पहले ब्लॉक स्तर पर होता था। कोविड को देखते हुए जिले के सभी 52 संकुल केंद्र पर इसकी व्यवस्था होगी। निशुल्क अधिनियम के दायरे में गरीबी रेखा के नीचे के परिवार, कमजोर वर्ग सहित अन्य श्रेणी को शामिल किया गया है। हिन्दुस्थान समाचार / अभिषेक





