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Tuesday, March 17, 2026
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इंदौर पानी विवाद: हाईकोर्ट ने MP सरकार को जमकर लताड़ा, मौतों के आंकड़ों पर खड़े किए गंभीर सवाल

इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले में हाई कोर्ट ने MP सरकार को कड़ी फटकार लगाई और गलत आंकड़े पेश करने पर गंभीर नाराजगी जताई।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। इंदौर में दूषित पेयजल से हो रही मौतों ने अब न्यायपालिका का ध्यान खींच लिया है। इस गंभीर मामले को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में अहम सुनवाई हुई, जहां कुल 5 जनहित याचिकाओं पर एक साथ विचार किया गया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाते हुए सख्त रुख अपनाया।

मौतों के आंकड़ों पर HC की नाराजगी

पिछली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में एक स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई थी, जिसमें दूषित पानी से सिर्फ 4 मौतों की जानकारी दी गई। जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। कोर्ट के संज्ञान में आया कि इस मामले में अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। इस विरोधाभास को लेकर हाई कोर्ट ने सरकार को कड़ी फटकार लगाई और रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए। कोर्ट ने कहा कि इतने गंभीर मामले में गलत आंकड़े पेश करना बेहद चिंताजनक है।

पूरे प्रदेश के पानी पर उठे सवाल

हाई कोर्ट ने सिर्फ इंदौर ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के पीने के पानी की गुणवत्ता पर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि अगर लोगों को मिलने वाला पानी ही दूषित है, तो यह बेहद गंभीर स्थिति है। यह समस्या केवल एक इलाके तक सीमित नहीं मानी जा सकती।

मुख्य सचिव को वर्चुअली पेश होने का आदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को वर्चुअली पेश होने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई की तारीख 15 जनवरी तय की गई है। कोर्ट ने साफ किया कि वह इस मामले में किसी और अधिकारी की नहीं, बल्कि सीधे मुख्य सचिव की बात सुनना चाहता है।

कोरोना की तरह मांगा मेडिकल बुलेटिन

कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया कि जिस तरह कोरोना महामारी के दौरान रोजाना मेडिकल बुलेटिन जारी किया जाता था, उसी तरह दूषित पानी से फैली बीमारी और मौतों का भी नियमित अपडेट दिया जाए।

अब तक 17 मौतें, 110 मरीज भर्ती

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार दूषित पानी से अब तक 421 लोग बीमार हुए, जिनमें से 311 मरीज डिस्चार्ज हो चुके हैं। फिलहाल 110 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि 15 मरीज आईसीयू में इलाजरत हैं।

15 जनवरी की सुनवाई पर टिकी निगाहें

अब पूरे प्रदेश की नजरें 15 जनवरी की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह साफ होगा कि सरकार इस गंभीर लापरवाही पर क्या जवाब देती है और आगे क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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