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Saturday, March 7, 2026
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कर्नाटक में कांग्रेस का बुलडोज़र एक्शन: 400 से ज्यादा मुस्लिमों के घर ढहाए, सियासी पारा हाई

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने बेंगलुरु के कोगिलु गांव में 400 से ज्यादा अवैध घरों को बुलडोज़र से गिराया।जिससे सैकड़ों लोग बेघर हो गए। इस कार्रवाई की केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने आलोचना की।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार का बुलडोज़र अभियान अब राजनीति का नया विवाद बन गया है। 22 दिसंबर को सुबह 4 बजे कोगिलु गांव के फकीर कॉलोनी और वसीम लेआउट में 400 से ज्यादा घरों को गिराया गया। अधिकांश प्रभावित परिवार मुस्लिम समुदाय से हैं। इस कार्रवाई से सैकड़ों लोग बेघर हो गए और ठंड में सड़कों पर या अस्थायी शेल्टरों में रात गुजारने को मजबूर हैं।

सरकार का दावा और निवासियों की आपत्ति

कर्नाटक सरकार ने कहा कि ये घर उर्दू गवर्नमेंट स्कूल के पास झील किनारे सरकारी ज़मीन पर अवैध रूप से बने थे। इसके बावजूद स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया और पुलिस ने जबरदस्ती उन्हें बेदखल किया। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कई लोग 25 सालों से इलाके में रह रहे हैं और उनके पास वैध आधार कार्ड व वोटर आईडी हैं। निकाले गए ज्यादातर लोग प्रवासी और मजदूरी कर जीवनयापन करते हैं।

विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक हलचल

कार्रवाई के खिलाफ लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा के घर के पास भी प्रदर्शन हुआ। दलित संघर्ष समिति समेत कई संगठनों ने भी इस कार्रवाई का विरोध किया।

केरल सरकार की निंदा

पड़ोसी राज्य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कांग्रेस सरकार की कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे “अल्पसंख्यक विरोधी राजनीति” बताया। उन्होंने कहा कि डर और ज़बरदस्ती से शासन करने वाली सरकारें संवैधानिक मूल्यों और मानवीय गरिमा का उल्लंघन करती हैं। केरल के मंत्री वी शिवनकुट्टी ने इसे “अमानवीय कार्रवाई” करार दिया और इसे इमरजेंसी दौर की याद दिलाने वाला बताया।

कर्नाटक उपमुख्यमंत्री का जवाब

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पिनाराई विजयन और CPI की आलोचना पर कहा कि यह इलाका अवैध कब्ज़े और कचरा फेंकने की जगह था, जिसे लैंड माफिया झुग्गी बस्ती में बदलने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोगों को नई जगह शिफ्ट करने का समय पहले ही दिया गया था। शिवकुमार ने पिनाराई पर तंज कसते हुए कहा कि नेताओं को ज़मीनी हकीकत जाने बिना टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।

यह मामला न केवल बेंगलुरु बल्कि पूरे कर्नाटक की राजनीति में गर्मागरम बहस का केंद्र बन गया है। कांग्रेस सरकार के बुलडोज़र अभियान ने शहर के गरीब और अल्पसंख्यक समुदायों को सीधे प्रभावित किया है, जबकि विपक्षी और पड़ोसी राज्यों ने इसे लोकतांत्रिक और मानवाधिकारों के दृष्टिकोण से सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।

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