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चित्त की वृत्तियों को चंचल होने से रोकना ही योग है : प्रो. जटाशंकर

मेदिनीनगर, 20 जून (हि.स.)। नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय के तत्वावधान स्नातकोत्तर दर्शनशास्त्र विभाग द्वारा रविवार की देर शाम को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में मुख्य अतिथि के पद से बोलते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र के पूर्व अध्यक्ष प्रोफ़ेसर जटाशंकर ने कहा कि योग की साधना के साथ एवं आचरण में सत्य की अनुसरण भी आवश्यक है। प्राणायाम एवं आसन आत्मिक बल प्रदान करता है। जिसके बाद व्यक्ति योग के उच्चतर साधना के लिए सक्षम हो जाता है। उन्होंने कहा कि प्रचलित जनमत के विपरीत लोग केवल प्राणायाम एवं आसन तक सीमित नहीं है अपितु योग की व्यापक अवधारणा एवं अनुप्रयोग है। बेबिनार का विषय था वर्तमान परिपेक्ष में योग का महत्व एवं अनुप्रयोग। डॉक्टर जटाशंकर ने आगे पतंजलि योग की गूढ़ अवधारणाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चित्त की वृत्तियों को चंचल होने से रोकना ही योग है। उन्होंने योग साधना के विभिन्न स्वरूपों यथा नियमा, सना, प्राणायाम प्रत्याहार, ध्रुव, ध्यान तथा समाधि की विस्तार से चर्चा की। बेबिनार के आरंभ में मुख्य संरक्षक के पद से बोलते हुए नीलाम्बर पीताम्बर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर (डॉ) राम लखन सिंह ने कहा कि योग भारत की प्राचीन धरोहर है जिसका मान एवं महत्ता पूरे विश्व में फैल गया है और सभी देशों में योग की बड़ी संख्या में अनुयाई हैं। तन एवं मन को स्वस्थ रखने के लिए योग आवश्यक है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का नारा है योगा फॉर बीइंग, अर्थात योग व्यक्ति के कुशल मंगल के लिए आवश्यक है। पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर डॉ अविनाश कुमार श्रीवास्तव ने अपनी प्रस्तुति में योग का मानसिक स्वास्थ्य एवं मानसिक आरोग्य में अनुप्रयोग पर विस्तार से बताया। उन्होंने तनाव अवसाद के कारण तंत्रिका तंत्र पर होने वाले प्रभाव तथा योग पद्धति से उनके निदान पर प्रकाश डाला। गढ़वाल विश्वविद्यालय की प्रोफेसर श्रीमती इंदु पांडे खंडूरी ने कोरोना एवं कोरोना त्रासदी का उल्लेख करते हुए कहा कि योग का पूरे संदर्भ एवं धारणा को समझने की आवश्यकता है। लोप्रति कुलपति प्रोफेसर डॉ दीप नारायण यादव ने भी संबोधित किया। अपने अध्यक्षीय भाषण में भारतीय अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर रामचंद्र सिन्हा ने कहा कि योग शब्द वेदों, उपनिषदों, गीता एवं पुराणों में पुरातन काल से व्यवहृत होता आया है। बेबिनार का संचालन डॉक्टर सीता कुमारी एवं धन्यवाद कला एवं मानविकी संकाय डॉ अनीता सिन्हा ने किया। हिन्दुस्थान समाचार/संजय

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