गुमला, 02 मार्च (हि.स.)। आदिवासी हिंदू थे, हैं और रहेंगे। वास्तव में जनजातीय समाज हिंदू समाज से कभी अलग नहीं रहा। उनकी पूजा पद्धति, जीवन शैली सब कुछ वैसा ही है जैसा हिंदू समाज का है। यह बात अखिल भारतीय वनवासी कल्याण केंद्र के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामचंद्र खराड़ी ने मंगलवार को कही। वे जशपुर से रांची लौटने के क्रम में रायडीह पतराटोली में भाजपा के वरिष्ठ नेता विनय कुमार लाल एवं वनवासी कल्याण केंद्र के जिला सचिव विनीत कुमार लाल के आवास में कुछ देर के लिए रूके थे। उनके साथ वनवासी कल्याण के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सतेंद्र सिंह एवं राष्ट्रीय ग्रामीण विकास प्रमुख बिंदेश्वर साहु भी थे। खराड़ी ने गुमला जिले में वनवासी कल्याण केंद्र की संगठनात्मक स्थिति, जनजातीय समाज की स्थिति, सामुदायिक वनाधिकार पट्टा, धर्मान्तरण और केंद्र से संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी ली। खराड़ी ने कहा कि एक साजिश के तहत जनजातीय समाज के बीच हिंदू से अलग धर्म होने का भ्रम फैलाया जा रहा है। उनके हिंदू न होने की बात कही जा रही है। लेकिन, यह बात सच नहीं है। पूरे देश का जनजातीय समाज भगवान राम के प्रति श्रद्धावान रहा है। भगवान राम ने जनजातीय समाज के सहयोग से ही लंका विजय की थी। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष रामचंद्र खराड़ी राजस्थान से आते हैं। वे पहले प्रशासनिक सेवा में थे। राजस्थान में जनजातीय समाज के विकास के लिए उन्होंने कई उल्लेखनीय कार्य किए हैं। अब भी राजस्थान के विभिन्न जनजातीय समाज के किसी भी निर्णय में उनकी अहम भूमिका रहती है। खराड़ी सेवानिवृत होने के बाद वनवासी कल्याण केंद्र से पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में जुड़े और अब वे राष्ट्रीय अध्यक्ष का दायित्व निभा रहे हैं। हिन्दुस्थान समाचार /हरिओम/वंदना/चंद्र





