कठुआ 22 मई (हि.स.)। कोरोना काल में जब हर कोई घर की चारदीवारी के अन्दर बन्द पड़ा हुआ है तथा बढ़ते हुए कोरोना मामलों से भय में अपना जीवन गुजार रहा है, तब सबसे ज्यादा जरूरत है अनुशासित दिनचर्या अपनाने की। आयुर्वेद शास्त्रों में वर्णित दिनचर्या का पालन करने से स्वस्थ शरीर के साथ साथ मानसिक मजबूती भी मिलती है। अनुशासित दिनचर्या किसी भी व्यक्ति को पूर्ण रूप से स्वास्थ्य प्रदान करती है। कोरोना काल में अनुशासित दिनचर्या का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि इस समय वैसे भी लाकडाऊन के कारण सभी लोग हर रोज की नियमित दिनचर्या अव्यवस्थित है। नकारात्मक ऊर्जा कहीं न कहीं हर तरफ फैली हुई है। सकारात्मक ऊर्जा के लिए, स्वस्थ शरीर व मानसिक मजबूती के लिए अनुशासित दिनचर्या का पालन समय की मांग भी है। सुबह जल्दी उठने की आदत डालें। उठते ही हल्के गुनगुने पानी का सेवन करें। शौच आदि क्रियाओं से निवृत्त होकर कुछ समय ध्यान में खुद को केन्द्रित करें। खुली ताजी हवा में योगासन, प्रणायाम का नियमित अभ्यास करें। मालिश करें व स्नान के बाद पूजा अर्चना के बाद संतुलित नाश्ते का सेवन करें। नाश्ते में ताजे मौसमी फल, दलिया, ओटस आदि का सेवन करें। दोपहर के भोजन में दाल, चावल, सब्जी, रोटी का सेवन कर सकते हैं। फलों का सेवन दोपहर से पहले पहले करने का प्रयत्न करें। शाम को ग्रीन टी, दालचीनी, सौंफ आदि वाली चाय, गिलोय का काढ़ा आदि का प्रयोग करें। रात का खाना हल्का लें व शाम 7 बजे तक खाने की आदत डालें। रात को सोने से पहले हल्दी वाला दूध ले सकते हैं। सुबह उठने के बाद कम से कम आधा घंटा व सोने से पहले आधा घंटा फोन से दूरी बनाए रखें। सुबह उठते ही ॐ, गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र का उच्चारण सकारात्मक ऊर्जा के लिए बहुत लाभदायक है। शाम के समय थोड़ा समय सैर, व्यायाम या बच्चों के साथ बिताएं। दही, केले आदि के सेवन का परहेज करें। हिन्दुस्थान/समाचार/सचिन/बलवान




