शिमला, 24 जून (हि. स.)। संत कबीर जयंती के अवसर पर गुरूवार को साहित्य परिषद शिमला इकाई द्वारा आनॅलाइन माध्यम से एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संगोष्ठी को संबोधित करते हुए साहित्य परिषद शिमला इकाई के उपाध्यक्ष डॉ विजयवर्गीय ने कहा कि आज के युग में भी संत कबीर की रचनाएं प्रासंगिक बनी हुई हैं। उन्होने कहा कि कबीर एक समाज सुधारक थे, जो समाज में फैली कुरीतियों पर निडरता से कटाक्ष करते थे। डॉ विजयवर्गीय ने कहा कि कबीर धर्म, जाति और समाज से ऊपर उठ कर अपनी रचनाएं की है। यह उनकी ही दूरदृष्टिता है कि उनके दोहे आज भी समाज में जागृति लाने का काम कर रहे हैं। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए डा प्ररेणा चुर्तवेदी ने संत कबीर को महान समाज सुधारक बताया। संत कबीर ने समाज में फैले हुए पाखंडों और आड़बरों की अपने दोहों के माध्यस से भत्र्सना की। उन्होने कहा संत कबीर मूर्ति पूजा के पक्षधर नहीं थे। वे ईश्वर के निराकर रूप को मानते थे। कबीर के साहित्य पर लगातार शोध जारी हैं। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए साहित्य परिषद शिमला की सदस्य डॉ सुनीत जसवाल ने कहा कि कबीर ज्ञानमार्गी थे। वे ज्ञान के माध्यम से ईश्वर की प्राप्ति की बात करते थे। कबीर ने जीवन में संतो की महता को अपने दोहों के माध्यम समझाया है। उन्होंने तीर्थ के स्थान पर संतों को अधिक महत्व दिया है। संगोष्ठी के समापन पर सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की अतिरिक्त निदेशक आरती गुप्ता ने कहा हमें संत कबीर को अपने जीवन को आत्मसात करना चाहिए। उनकी शिक्षाएं आज भी मूल्यवान बनी हुई हैं। इस अवसर पर शाक्षी शर्मा और मीनाक्षी सूद ने कबीर की काव्य रचनाएं का गान किया। संगोष्ठी में डा शर्मिला भटट, डा मंजू पुरी, अनिल मिश्रा, डा सपना चंदेल, डा प्ररेणा चुर्तवेदी, डा मनोज चुर्तवेदी और साहित्य परिषद शिमला के सचिव डा रामकृण्ण मारकण्ड़े भी उपस्थित थे। हिन्दुस्थान समाचार/सुनील/उज्जवल




