back to top
29.1 C
New Delhi
Thursday, March 12, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Defamation Case: राहुल गांधी के लिए Lok Sabha Election 2024 की राह कितनी मुश्किल-कितनी आसान?

Lok Sabha Election 2024: गुजरात हाईकोर्ट से मोदी सरनेम विवाद में राहुल गांधी को राहत ना मिलने पर 2024 का चुनाव लड़ने की उनकी राह अब आसान नहीं।

नई दिल्ली, (संतोष मिश्रा)। Rahul Gandhi Defamation Case: कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को आज शुक्रवार को गुजरात हाईकोर्ट ने बड़ा झटका दे दिया है। गुजरात उच्च न्यायालय ने ‘मोदी उपनाम’ टिप्पणी के खिलाफ मानहानि मामले में राहुल गांधी की सजा पर रोक लगाने से इनकार करते हुए सत्र न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा है। गुजरात उच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद राहुल गांधी के 2024 में लोकसभा चुनाव लड़ने की राह भी मुश्किल हो गई है।

न्यायालय का फैसला 2024 चुनाव की राह में रोड़ा

गुजरात हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की पुनर्विचार याचिका खारिज कर निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया। गुजरात हाईकोर्ट का कहना है कि ट्रायल कोर्ट का दोषी ठहराने का आदेश उचित है, उक्त आदेश में हस्तक्षेप करने की कोई जरूरत नहीं है, इसलिए आवेदन खारिज किया जाता है।

10 मामले और हैं लंबित

कोर्ट ने आगे कहा कि राहुल गांधी के खिलाफ कम-से-कम 10 आपराधिक मामले लंबित हैं। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राहुल गांधी अब 2024 लोकसभा चुनाव नहीं लड़ पाएंगे और न ही संसद सदस्य (सांसद) के रूप में अपनी स्थिति के निलंबन को रद्द करने की मांग नहीं कर पाएंगे।

राहुल गांधी के पास सुप्रीम कोर्ट का विकल्प शेष

गुजरात हाईकोर्ट से मोदी सरनेम विवाद में राहुल गांधी को राहत ना मिलने पर 2024 का चुनाव लड़ने की राह उनके लिए और मुश्किल होती नजर आ रही है। हालांकि हाईकोर्ट के फैसले के बाद राहुल के पास अभी सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प शेष है। यदि सुप्रीम कोर्ट मोदी सरनेम पर टिप्पणी को लेकर मानहानि के केस में राहुल गांधी को ट्रायल कोर्ट से दोषी ठहराने वाले आदेश पर निचली अदालत के फैसले पर रोक लगा देता है। तब वे 2024 का चुनाव लड़ सकते हैं। कांग्रेस को उम्मीद थी कि गुजरात हाईकोर्ट अगर निचली अदालत के फैसले पर रोक लगा देता तो राहुल गांधी का 2024 के चुनाव मैदान में उतरने का रास्ता साफ हो जाता।

क्या था मामला?

2019 लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कर्नाटक में एक रैली के दौरान भीड़ के सामने ‘मोदी सरनेम’ को लेकर बयान दिया था। इस बयान में उन्होंने कहा था कि सारे चोर के सरनेम में मोदी क्यों होता है। इसके बाद से ही भाजपा उन पर हमलावर हो गई थी। वहीं, भाजपा ने इसे ओबीसी समुदाय से जोड़ कर उनका अपमान करने का मामला बनाया। वहीं कांग्रेस इससे इनकार करती रही। इसी को लेकर बीजेपी के विधायक पूर्णेश मोदी ने राहुल के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया। इसके बाद करीब चार साल बाद 23 मार्च को सूरत की निचली अदालत ने राहुल को दोषी करार देते हुए 2 साल की सजा सुनाई।

क्या है कानून?

दरअसल, जनप्रतिनिधि कानून में प्रावधान है कि अगर किसी सांसद और विधायक को किसी मामले में 2 साल या उससे ज्यादा की सजा होती है, तो उनकी सदस्यता (संसद और विधानसभा से) रद्द हो जाती है। इतना ही नहीं सजा की अवधि पूरी करने के बाद छह वर्ष तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य भी हो जाते हैं।

Advertisementspot_img

Also Read:

क्या लोक अदालत के फैसले को हाई कोर्ट में दी जा सकती है चुनौती? जानें कब मिलती है राहत और कौन से मामले नहीं...

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। लोक अदालत का फैसला आमतौर पर अंतिम माना जाता है, क्योंकि यह दोनों पक्षों की सहमति से होता है। हालांकि कुछ...
spot_img

Latest Stories

Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि से पहले घर लाएं ये चीजें, दूर होंगी कंगाली

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। चैत्र नवरात्रि में माता रानी...

फारूक अब्दुल्ला पर हुई फायरिंग को लेकर टेंशन में गुलाम नबी आजाद, गंभीर जांच की मांग की

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बुधवार की रात जम्मू कश्मीर के...

पेट्रोल-डीजल और गैस की किल्लत पर सरकार का एक्शन, अमित शाह की अध्यक्षता में कमिटी बनाई

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई...

गर्मियां शुरू होने से पहले घूम आएं ये जगहें, मार्च में घूमने के लिए हैं बेस्ट

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। मार्च के महीने में न...

इच्छामृत्यु पर बनी इन फिल्मों को देखकर रह जाएंगे हैरान, जानिए लिस्ट

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। आपको बता दें कि, इस...