Patanjali Misleading AD: सुप्रीम कोर्ट से आईएमए को कड़ी फटकार, कहा-मरीजों को महंगी दवाइयां लिखना बंद कराएं

कोर्ट ने आईएमए को अस्पतालों में चल रही अनएथिकल प्रैक्टिस रोकने के लिए कहा है।
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नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि भ्रामक विज्ञापन मामले में मंगलवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. आर.वी अशोकन की टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई। हिमा कोहली और अहसनउद्दीन अमानउल्लाह के सामने बाबा रामदेव के वकील मुकुल रोहतगी ने अध्यक्ष द्वारा दिए एक इंटरव्यू को सामने रखा। जिसके बाद बेंच ने आपत्ति जताई।

वकील रोहतगी ने क्या कहा?

रोहतगी का कहना है कि उन्होंने आईएमए के अध्यक्ष का एक इंटरव्यू देखा, जिसमें वह कोर्ट द्वारा उनपर उंगली उठाने को लेकर सवाल कर रहे हैं। यह साफ तौर पर कंटेप्ट ऑफ कोर्ट है।

बेंच का तर्क

जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा कि उस इंटरव्यू को रिकॉर्ड पर रखा जाए। यह उस सब से गंभीर है, जो अब तक इस मामले में हुआ है। आईएमए, जो मामले में याचिकाकर्ता है, उन्हें 23 अप्रैल को कोर्ट की तरफ से तीखे कमेंट का सामना करना पड़ा था। कोर्ट ने एसोसिएशन को कहा है कि वह पहले अपने फील्ड में हो रही गलत गतिविधियों को रोकें। जैसे कि महंगी दवाइयां रोगियों को लिखना।

क्या कहा कोर्ट ने याचिकाकर्ता को

याचिकाकर्ता के लिए जरूरी है वह पहले खुद अनएथीकल प्रैक्टिस पर लगाम लगाए। क्योंकि जो दवाईयां डॉक्टरों द्वारा लिखी जाती है वह काफी महंगी होती हैं साथ ही गैर जरूरी भी। जहां कहीं भी किसी डॉक्टर द्वारा उसके पद का गलत फायदा उठाया जा रहा है, उसके खिलाफ कड़े कदम उठाए जाने चाहिए।

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